देहरादून,
उत्तराखण्ड में कॉर्बेट टाइगर रिजर्व से जुड़े लैंसडोन, रामनगर और हल्द्वानी के वन प्रभागों में अब बाघों के संरक्षण का दायरा बढ़ाया गया है। इसके लिए भारत सरकार ने कुल 5.40 करोड़ रुपये का बजट दिया है। इस धनराशि से इन वन क्षेत्रों में रेस्क्यू सेंटर बनाए जाएंगे, जिससे घायल या बीमार बाघों को वहीं उपचार और देखभाल मिल सकेगी। इससे कॉर्बेट के ढेला रेस्क्यू सेंटर पर पड़ने वाला दबाव भी कम होगा।
बता दें, पहली बार टाइगर रिजर्व के बाहर के वन प्रभागों को बाघों के संरक्षण के लिए अलग से बजट दिया गया है। देश में करीब 3682 बाघ हैं, जिनमें से लगभग 30 प्रतिशत बाघ ऐसे ही बाहरी वन क्षेत्रों में रहते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने “टाइगर आउटसाइड टाइगर रिजर्व (TOTR)” योजना के तहत यह बजट जारी किया है। लैंसडोन, रामनगर, तराई पश्चिमी, हल्द्वानी, केंद्रीय पूर्वी और तराई केंद्रीय वन प्रभागों को 90-90 लाख रुपये दिए गए हैं। इस पैसे से हर वन प्रभाग में करीब 10 लाख रुपये की लागत से एक बड़ा कक्ष बनाया जाएगा, जहां घायल या आबादी में आ गए बाघों को रखा जा सकेगा।
बाकी धनराशि से
बाघों की सुरक्षा के लिए जरूरी उपकरण खरीदे जाएंगे। इसमें पिंजरे, बेहोश करने की दवाएं, टॉर्च, हेलमेट, जूते, दूरबीन, थर्मल ड्रोन, वायरलेस सिस्टम, कैमरा ट्रैप, जीपीएस और गश्त के लिए
मोबाइल फोन शामिल हैं। साथ ही, मानव और वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए
जागरूकता कार्यक्रम और कार्यशालाएं भी आयोजित की जाएंगी। इस पहल से बाघों की
सुरक्षा और बेहतर होगी और लोगों तथा वन्यजीवों के बीच होने वाले संघर्ष को भी कम
किया जा सकेगा।



