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पं. दीनदयाल जी ने राजनीतिक क्षेत्र में निष्कलंक रहने का आदर्श उदाहरण प्रस्तुत किया - अशोक बेरी जी

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चित्रकूट

 दीनदयाल शोध संस्थान चित्रकूट के कार्यकताओं ने पं. दीनदयाल उपाध्याय जी की 110वीं जयंती पर कार्यक्रम किए। दीनदयाल परिसर, उद्यमिता विद्यापीठ चित्रकूट के दीनदयाल पार्क में आयोजित कार्यक्रम में संस्थान के विविध प्रकल्प गुरुकुल संकुल, उद्यमिता विद्यापीठ, सुरेन्द्रपाल ग्रामोदय विद्यालय, रामदर्शन, आईटीआई एवं आरोग्यधाम के कार्यकर्ताओं ने पं. दीनदयाल जी की प्रतिमा पर पुष्पार्चन किया।

दीनदयाल परिसर का सामूहिक कार्यक्रम विवेकानन्द सभागार में आयोजित किया गया, जिसमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक अशोक बेरी जी, गायत्री शक्तिपीठ के व्यवस्थापक डॉ. रामनारायण त्रिपाठी जी, महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. भरत मिश्रा जीतथा दीनदयाल शोध संस्थान के सह संगठन सचिव अनिल अग्रवाल जी मंचस्थ रहे।


अशोक बेरी जी ने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी का उद्घोष था कि व्यक्ति परिवार के बिना अधूरा है, परिवार समाज के बिना, समाज राष्ट्र के बिना और राष्ट्र विश्व के बिना अधूरा है। सम्पूर्णता ही जीवन का लक्ष्य है। उन्होंने वसुधैव कुटुंबकम की भावना के साथ जीवन के विभिन्न आयामों में आगे बढ़ते हुए विभिन्न विचार प्रस्तुत किये। उन्होंने राजनीतिक क्षेत्र में रहते हुए कैसे निष्कलंकित रह सकते हैं, उसका आदर्श उदाहरण प्रस्तुत किया।

डॉ. भरत मिश्रा जी ने कहा कि पं. दीनदयाल जी का विचार दर्शन और जीवन हम सबके लिये प्रेरणादायी है। उन्होंने भारतीय चिंतन और भारतीय राजनीति को नया आयाम दिया। उनके अंतिम पंक्ति तक विकास और अंत्योदय की बात, ‘मैं नहीं हम’ के भाव से काम करने वाले श्रद्धेय नानाजी भी दीनदयाल जी से इतने प्रभावित थे कि उन्होंने उनके नाम पर ही दीनदयाल शोध संस्थान का काम खड़ा करके उनके एकात्म मानवदर्शन को व्यावहारिक रूप प्रदान किया।


डॉ. रामनारायण त्रिपाठी जी ने कहा कि पं. दीनदयाल जी के विचारों से संकलित नानाजी ने जो कार्य खड़ा किया है। वह हमारे सामने है, श्रद्धेय नानाजी देशमुख ने पंडित दीनदयाल जी के अंत्योदय के विचार को ‘हम अपने लिए नहीं, अपनों के लिए है, अपने वे हैं जो पीड़ित और उपेक्षित है’ के ध्येय के साथ मूर्ति रूप देने का काम किया है।