अयोध्या
परंपरागत धार्मिक पुस्तकों से हटकर मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम के 130 विभिन्न सद्गुणों को सहज भाषा में रेखांकित करने वाली “सद्गुण श्री राम” पुस्तक तीर्थ क्षेत्र के महासचिव चम्पत राय को भेंट की।
कारसेवकपुरम शिविर कार्यालय में भेंट के दौरान आंध्र प्रदेश के नेल्लोर निवासी सेवानिवृत एनआईसी (नेशनल इनफॉरमेशन सेंटर) निदेशक सुब्रमण्यम साईं सूरी द्वारा रचित सद्गुण श्री राम सामान्य से बड़े आकार की पुस्तक है। सूरी का मानना है कि हमारा अध्यात्म विस्तृत है, इस पर अनेक पुस्तकें भी हैं, किंतु देश की धर्म परायण जनता आध्यात्मिक पुस्तकों को पूजन के स्थान पर रखकर उनकी स्तुति करती है। जबकि वर्तमान समय में आवश्यक यह है कि वह पुस्तक क्या संदेश देती है, उसे जीवन में ग्रहण किया जाए। यथा, देश में विभिन्न भाषाओं में रचित रामायण तो उपलब्ध हैं, किंतु उसका वास्तविक संदेश ग्रहण करने से आम समाज वंचित है। इसी को ध्यान में रखकर सद्गुण श्री राम की रचना की गई। पुस्तक में प्रभु श्री राम के 130 सद्गुणों के बारे में चित्र सहित बताया गया है। प्रत्येक पृष्ठ पर अलग-अलग गुणों की व्याख्या करते हुए अति सरल भाषा में समझाने योग्य बनाया गया है। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र महासचिव चम्पत राय ने पुस्तक की सराहना करते हुए कहा कि निश्चित ही प्रयास सफल होगा व भावी पीढ़ी को इससे सीख मिलेगी।



