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अल्मोड़ा की महिलाओं ने लिखा आत्मनिर्भरता का नया अध्याय

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अल्मोड़ा, उत्तराखण्ड 

ओरेगैनो, तुलसी, कैमोमाइल यह मात्र जड़ी-बूटियों के नाम नहीं  बल्कि एक पहाड़ी गाँव की पहचान बन चुके हैं। उत्तराखण्ड के अल्मोड़ा जनपद का एक छोटा सा गांव, जहां कभी आर्थिक तंगी थी। आज इन्हीं जड़ी-बूटियों का स्टार्टअप हब बन चुका है और इसे कर दिखाया है- दीपा लोधियाल ने। जिन्होंने साल 2018 में एक महिला समूह बनाकर जड़ी-बूटियों से हर्बल प्रोड। क्ट बनाने की ठानी शुरुआत में उन्हें डर जरूर लग रहा था, लेकिन कुछ करने का संकल्प भी प्रगाढ़ था।  तो धीरे-धीरे काम बढ़ता गया। आज यह समूह रोजमेरी, थाइम, कैमोमाइल, मिंट जैसी जड़ी-बूटियों से 7 तरह की हर्बल चाय, जैम, जेली, जूस, चटनी और पहाड़ी नमक तैयार कर रहा है। और सबसे विशेष बात ये है कि इन उत्पादों की डिमांड अब गांव तक सीमित नहीं बल्कि इंडिया पोस्टर के माध्यम से देश-विदेश तक सप्लाई हो रही है। 

आज इस समूह की प्रत्येक महिला ने अपना हर्बल गार्डन तैयार कर लिया है और आत्मनिर्भरता की मिसाल बन चुकी हैं।  कम लागत और बढ़ती मांग ने इस काम को आमदनी का अच्छा माध्यम बना दिया है। जहां एक तरफ पारंपरिक खेती सीमित आय देती थी।  वहीं हर्बल खेती नई उम्मीद बनकर उभरी है। हालांकि पैकेजिंग और मार्केटिंग जैसी चुनौतियां अभी भी मौजूद हैं। लेकिन इन महिलाओं का हौसला हर मुश्किल पर भारी पड़ रहा है। जड़ी-बूटियों की खेती ने न केवल इन महिलाओं की जिंदगी बदली हैबल्कि पूरे इलाके में आत्मनिर्भर भारत की एक नई मिसाल पेश की है। ये कहानी है हौसले की , मेहनत की और उस आत्मनिर्भर भारत की जो गांव-गांव में आकार ले रहा है।