गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश
जब शहरों में हरियाली कम होती जा रही है
और कंक्रीट के जंगल बढ़ रहे हैं, तब
कुछ लोगों ने पर्यावरण संरक्षण को केवल जिम्मेदारी नहीं, बल्कि अपना जीवन का कर्तव्य बना लिया है और यह निस्वार्थ सेवा
आज समाज के लिए प्रेरणा बन गई है।
जी हां, पिछले लगभग 20 वर्षों से यह टोली बिना किसी
प्रचार-प्रसार या सरकारी सहायता की अपेक्षा किए लगातार पौधारोपण और उनकी देखभाल कर
रही है। इनके प्रयासों से अब तक शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में 25 हजार से अधिक छायादार, फलदार और औषधीय पौधे लगाए जा चुके हैं।
इनमें से हजारों पौधे आज बड़े वृक्ष बन चुके हैं और लोगों को छाया, स्वच्छ हवा और बेहतर वातावरण प्रदान कर
रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, राजनगर स्थित सेव
अर्थ चैरिटेबल ट्रस्ट के माध्यम से चल रही यह मुहिम केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं
है। टीम का सबसे बड़ा उद्देश्य पौधों को जीवित रखना है। इसी कारण सदस्य हर सुबह छह
बजे से साढ़े सात बजे तक ई-रिक्शा और छोटे वाहनों में पानी की टंकियां भरकर शहर की
ग्रीन बेल्ट और सड़कों के किनारे लगाए गए पौधों की सिंचाई करते हैं। साथ ही उनकी
सुरक्षा और देखभाल भी नियमित रूप से करते हैं।
इस अभियान की शुरुआत पर्यावरण प्रेमी
अभय त्यागी ने अकेले की थी। धीरे-धीरे इस नेक कार्य से उद्यमी, सेवानिवृत्त अधिकारी-कर्मचारी और
सामाजिक कार्यकर्ता जुड़ते गए। आज डॉ. राकेश चावला, अजय मित्तल, अश्विनी शर्मा, शिव कुमार शर्मा और धर्मेंद्र सहित कई
सदस्य नियमित रूप से श्रमदान कर रहे हैं। वहीं अरुण त्यागी, पंकज गुप्ता, राजीव मल्होत्रा और मनोज कुमार जैसे
सहयोगी आर्थिक और अन्य संसाधनों से इस अभियान को मजबूती दे रहे हैं।
टीम के सदस्य बताते हैं कि पौधारोपण और
उनकी देखभाल का अधिकांश खर्च वे अपनी पेंशन और निजी आय से उठाते हैं। वे किसी से
सहायता नहीं मांगते। यदि कोई व्यक्ति स्वेच्छा से पौधे, पानी या अन्य सहयोग देता है तो उसका
सम्मानपूर्वक स्वागत किया जाता है। अब कई स्थानीय निवासी भी इस अभियान से प्रेरित
होकर पौधे दान करने लगे हैं।
इस मुहिम के तहत नीम, पीपल, पिलखन, सहजन, आम, इमली, बेल और अन्य देशी प्रजातियों के पौधे लगाए गए। इन पर्यावरण रक्षको का संदेश स्पष्ट है कि प्रकृति की रक्षा करना हम सभी का कर्तव्य है। यदि हर नागरिक एक पौधा लगाकर उसकी जिम्मेदारी निभाए, तो आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ, स्वस्थ और हराभरा भारत मिल सकता है।



