देहरादून जौनसार बावर में 39 लोगों का संयुक्त परिवार बना मिसाल एक रसोई, एक खेती और साझा जिम्मेदारी से मजबूत हो रहे रिश्ते
देहरादून, उत्तराखण्ड
आधुनिक दौर में जहां एकल परिवारों का चलन तेजी से बढ़ रहा है, वहीं कोठा तारली गांव का 39 लोगों का संयुक्त परिवार भारतीय संस्कृति और पारिवारिक मूल्यों की जीवंत मिसाल बना हुआ है।
चंदन सिंह तोमर के इस परिवार में चाचा-चाची, भाई-भाभी, बहनें और बच्चे सभी एक साथ रहते हैं। परिवार के सदस्य एक ही रसोई में भोजन करते हैं, साझा संसाधनों का उपयोग करते हैं और हर जिम्मेदारी मिलकर निभाते हैं।
साझा जिम्मेदारी बना रही रिश्तों को मजबूत
परिवार के सदस्यों का कहना है कि आपसी सहयोग और साझा आय ही उनके मजबूत रिश्तों का आधार है। कोई खेती संभालता है, कोई बागवानी, तो कोई घर और बच्चों की जिम्मेदारी निभाता है।
संयुक्त परिवार की यही भावना “मैं” से अधिक “हम” की संस्कृति को मजबूत करती है।
खेती बना परिवार की एकता का आधार
कृषि और बागवानी से जुड़ा यह परिवार इन दिनों अपने खेतों में लहसुन की तैयार फसल निकालने में जुटा हुआ है। पहाड़ की ढलानों पर पूरा परिवार एक साथ श्रम करता दिखाई देता है।
संयुक्त परिवार होने के कारण खेती के लिए मजदूरों की जरूरत नहीं पड़ती, जिससे लागत कम और मुनाफा अधिक होता है। परिवार अब नकदी फसलों पर भी विशेष जोर दे रहा है।
“कुटुंब प्रबोधन” और “पंच परिवर्तन” की मिसाल
यह परिवार केवल खेती नहीं कर रहा, बल्कि भारतीय संस्कृति, सामाजिक समरसता और पारिवारिक एकता का संदेश भी दे रहा है।
खेतों में काम के दौरान हंसी-मजाक, लोकगीत और आपसी तालमेल ग्रामीण जीवन की सादगी और मजबूती को दर्शाते हैं। परिवार के बुजुर्गों का अनुभव और बच्चों का उत्साह इस परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचा रहा है।
गांव और परिवार से जुड़ाव ही असली सुख
रेलवे से सेवानिवृत्त होने के बाद 40 वर्षों बाद चंदन सिंह तोमर और 15 वर्षों बाद दीवान सिंह फिर अपने गांव और खेतों में लौटे हैं। उनका मानना है कि जीवन का वास्तविक सुख अपनी मिट्टी, अपने गांव और अपने परिवार के बीच ही मिलता है।
बदलते दौर में भी जीवित है संयुक्त परिवार की परंपरा
परिवार के सदस्यों का कहना है कि शिक्षा, रोजगार और पलायन के कारण संयुक्त परिवारों की संख्या लगातार कम हो रही है। बावजूद इसके जौनसार बावर के ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी संयुक्त परिवार की परंपरा जीवित है।
कोठा तारली का यह परिवार नई पीढ़ी को यह संदेश दे रहा है कि संयुक्त परिवार केवल रहने की व्यवस्था नहीं, बल्कि भारतीय समाज की सबसे बड़ी ताकत है।



