• अनुवाद करें: |
विशेष

AI ने बदला तकनीकी परिदृश्य

  • Share:

  • facebook
  • twitter
  • whatsapp

 AI ने बदला तकनीकी परिदृश्य 

उत्तर प्रदेश पारंपरिक रूप से अपनी कृषि-आधारित अर्थव्यवस्था और समृद्ध विरासत के लिए जाना जाता रहा है। विगत वर्षों में डिजिटल इंडिया कार्यक्रम, एआई तकनीक और स्टार्टअप हब ने राज्य की छवि बदली है। इसी वजह से वर्तमान में यह राज्य देश के तीसरे सबसे बड़े स्टार्टअप इकोसिस्टम के रूप में उभर चुका है। यह इकोसिस्टम राज्य के 75 जिलों में से 49 जिलों में कार्यरत है और ऐसा करने वाला यह देश का पहला राज्य बन चुका है।

उत्तर प्रदेश का हालिया एआई तकनीकी परिदृश्य राज्य के विशाल जनसांख्यिकीय लाभांश को युवा-नेतृत्व वाले आर्थिक इंजन में बदलने की एकीकृत रणनीति को दर्शाता है। अवसंरचना, कौशल विकास और उद्यम सशक्तीकरण को एकीकृत करके राज्य ने एक सुसंगत एआई डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण किया है। जमीनी स्तर पर उद्यम संचालन ”मुख्यमंत्री युवा योजना“ के तहत यूपीआईकॉन के ”यूथ अड्डा“ द्वारा क्रियान्वित है, जो सरकारी सहायता को ग्राहकों के लिए सुलभ केंद्रों में परिवर्तित करता है। इतना ही नहीं, एकल-खिड़की ऋण सुविधा, अनुपालन और 100 से अधिक सरल फ्रेंचाइजी मॉडल भी उपलब्ध हैं।

इस नेटवर्क को तकनीकी आधार प्रदान करने वाला महत्वपूर्ण समझौता इंडिया एआई और यूपीडेस्को के बीच हुआ है, जिसके तहत टियर-II, टियर-III और ग्रामीण जिलों में 65 डेटा और एआई प्रयोगशालाएँ स्थापित की गई हैं, जहाँ विशेष कंप्यूटिंग क्षमता और वास्तविक दुनिया का प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है। इस संरचना को एआई-प्रज्ञा कौशल विकास पहल द्वारा बल दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मशीन लर्निंग और उभरती प्रौद्योगिकियों में 10 लाख युवाओं को प्रशिक्षित करना है। ये पूरक नीतियाँ मिलकर तकनीकी कौशल विकास और उद्यम निर्माण के बीच की खाई को पाटती हैं। साथ ही, अग्रणी प्रौद्योगिकी का लोकतंत्रीकरण करती हैं, स्थानीय लघु एवं मध्यम उद्यमों का डिजिटलीकरण करती हैं और डिजिटल इंडिया के तहत उत्तर प्रदेश को नवाचार, ऋण जुटाने और युवा-संचालित विकास के लिए एक अग्रणी क्षेत्रीय केंद्र के रूप में स्थापित करती हैं।

इस नीतिगत पहल के मूल में राज्य भर में वितरित डेटा और एआई प्रयोगशालाओं द्वारा अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी को मौलिक रूप से विकेंद्रीकृत करना है, जिससे लखनऊ और गोरखपुर में NIELIT सुविधाओं के साथ-साथ पीलीभीत जैसे स्थानों से भी उद्योग-साझेदारी वाली प्रयोगशाला सुचारु रूप से कार्य कर सके। यह रोडमैप तकनीकी सशक्तीकरण के लिए एक व्यापक भौतिक नेटवर्क तैयार करता है। इन प्रयोगशालाओं ने उच्च-प्रदर्शन कंप्यूटिंग क्षमता, विशेषीकृत सॉफ्टवेयर सूट, चयनित डेटासेट और लक्षित शिक्षण मॉड्यूल को सुगम किया है। इस वजह से स्थिर और सैद्धांतिक शिक्षा पर निर्भर रहने के बजाय यह वास्तविक दुनिया से जुड़े ज्ञान की बात करता है।

एआई तकनीक रीयल टाइम पर काम करने का बेहतरीन उदाहरण है। इसके माध्यम से क्राउड मॉनिटरिंग द्वारा उत्तर प्रदेश पर्यटन और संस्कृति विभाग काशी विश्वनाथ मंदिर, राम मंदिर और गोरखनाथ मंदिर में फुटफॉल काउंटिंग और रियल-टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम स्थापित कर रहा है। यह तकनीक सुरक्षा के साथ-साथ आने-जाने वाले श्रद्धालुओं के डेटा और फ्लो पैटर्न को ग्राफिक्स के रूप में प्रदर्शित करती है ताकि प्रबंधन समिति को अधिक से अधिक डेटा प्राप्त हो सके और भविष्य में आने वाली किसी भी प्रकार की जानी-अनजानी चुनौती का आसानी से सामना किया जा सके।

पहले बच्चे कंप्यूटर गेम्स मनोरंजन के लिए खेलते थे, लेकिन अब यह प्रोफेशन का रूप ले चुका है, जिसमें गेम डिजाइनर बड़े और जटिल गेमिंग वर्ल्ड बनाने के लिए प्रोसीजरल कंटेंट जनरेशन एआई टूल्स का उपयोग कर रहे हैं, जिससे हफ्तों का काम कुछ घंटों में हो जाता है। इसे विकसित करने वाले युवा महज 18 से 20 वर्ष की आयु के होते हैं, जो वर्तमान में एआई गेम को जीवनयापन के विकल्प के रूप में देखते हैं।

कहा जा सकता है कि एआई के आने से पुराने शैक्षिक और प्रोफेशनल कार्यों को करने के तरीकों में क्रांतिकारी बदलाव आए हैं। यह दृष्टिकोण उभरती प्रौद्योगिकी में संरचनात्मक कौशल अंतर को सीधे लक्षित करता है। यह सुनिश्चित करता है कि स्थानीय छात्र निष्क्रिय डिजिटल उपभोक्ताओं से सक्रिय डेवलपर्स में परिवर्तित हों, जो उद्यम-स्तरीय AI समाधानों का निर्माण, परीक्षण और तैनाती करने में सक्षम हों।

केस स्टडी-1

औद्योगिक आपूर्ति का डिजिटलीकरण - ‘मोग्लिक्स’

संस्थापक - राहुल गर्ग: औद्योगिक वस्तुओं के लिए सुगम B2B लेनदेन को सुविधाजनक बनाना मोग्लिक्स की व्यावसायिक रणनीति का मुख्य आधार है। यह प्लेटफॉर्म आपूर्तिकर्ताओं, निर्माताओं और कंपनियों को एक साथ जोड़कर उत्पादों की प्रभावी खरीद-बिक्री को आसान बनाता है। मोग्लिक्स मुख्य रूप से अपने प्लेटफॉर्म पर होने वाले सफल लेनदेन पर कमीशन या शुल्क लेकर आय अर्जित करता है, जो इसके लेनदेन-आधारित व्यापार मॉडल को दर्शाता है। इसके अलावा, यह कंपनी आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) अनुकूलन, विक्रेता वित्तपोषण (वेंडर फाइनेंसिंग) और थोक छूट (बल्क डिस्काउंट) जैसी मूल्यवर्धित सेवाएँ प्रदान करके भी अपना मुनाफा कमाती है।

खरीद दक्षता में सुधार करने, एक भरोसेमंद एवं पारदर्शी बाज़ार उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता के कारण मोग्लिक्स ने औद्योगिक खरीद उद्योग में एक प्रमुख भागीदार के रूप में अपनी मजबूत पहचान स्थापित की है, जिससे यह भारत में B2B वाणिज्य के डिजिटल रूपांतरण में अग्रणी बन गया है।

केस स्टडी-2

एड-टेक में क्रांति ‘फिजिक्स वाला’ (Physics Wallah) संस्थापक: अलख पांडे, प्रयागराज (उत्तर प्रदेश)

इस संस्था ने देश में मेडिकल और इंजीनियरिंग (JEE/NEET) की महँगी कोचिंग के विकल्प के रूप में बेहद किफायती दामों पर एआई-एकीकृत और इंटरैक्टिव डिजिटल शिक्षा की शुरुआत की। यह शिक्षा के लोकतंत्रीकरण की शुरुआत थी, जो प्रयागराज के एक छोटे से कमरे से शुरू होकर आज भारत के सबसे बड़े एड-टेक ‘यूनिकॉर्न’ में बदल चुका है।

केस स्टडी-3

स्वास्थ्य सेवा में एआई - ‘इन्नोवेसर’ (Innovaccer)

संस्थापक: अभिनव शशांक और टीम (नोएडा, उत्तर प्रदेश): यहां अस्पतालों और डॉक्टरों के पास उपलब्ध मरीजों के डेटा का विश्लेषण कर, उन पर आधारित एक क्लाउड एआई प्लेटफॉर्म तैयार कर स्वास्थ्य सेवा में पहली बार लोकतांत्रिक स्वास्थ्य सेवा की पहल हुई। इतना ही नहीं, यह प्लेटफॉर्म वैश्विक स्तर पर पहचान बनाने वाले सबसे बड़े डेटा एनालिटिक्स प्लेटफॉर्मों में से एक है।

ये कुछ केस स्टडी सरकार, व्यक्तिगत क्षमता निर्माण के अलावा डिजिटल इंडिया की दूरदर्शिता का परिणाम हैं, जो युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत का कार्य कर रही हैं। ऐसे बहुत से उदाहरण हमारे बीच हैं, जो सही सलाह और मार्गदर्शन के उपरांत अपनी पहचान बना रहे हैं और रोजगार ढूँढ़ने वाले न बनकर रोजगार देने वाले बनना पसंद कर रहे हैं।

वर्तमान समय में सरकार द्वारा अनेक ऐसी योजनाएँ हैं, जो समाज के प्रत्येक वर्ग को समान रूप से अवसर प्रदान कर रही हैं, जैसे महिलाएँ, बच्चे, बुजुर्ग इत्यादि। उसी क्रम में तकनीकी ज्ञान भी प्रत्येक वर्ग को समान अवसर दे रहा है, जिससे समाज का प्रत्येक तबका अपनी बुद्धिमत्ता का प्रयोग कर समय के साथ चल सके।

एआई-प्रज्ञा - सुरक्षित प्रशासन और महिला सुरक्षा की दिशा में पहल: ‘एआई-प्रज्ञा’ का शुभारंभ उत्तर प्रदेश के उस रणनीतिक रोडमैप में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जिसके तहत उत्तर प्रदेश सरकार स्मार्ट सिटी निगरानी के माध्यम से महिलाओं की सुरक्षा को कृत्रिम बुद्धिमत्ता से सुनिश्चित करने का प्रयास कर रही है।

राज्य भर में महिलाओं के लिए एआई तकनीक को बढ़ावा देने के लिए एआई-प्रज्ञा और महिला एआई मिशन जैसे डिजिटल कौशल विकास कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। महिलाओं की सुरक्षा और स्मार्ट पुलिसिंग के माध्यम से प्रमुख नगर निगमों में शातिर अपराधी गिरोहों को पकड़ने और उन पर निगरानी के लिए स्मार्ट सीसीटीवी और चेहरे की पहचान करने वाले उपकरणों की तैनाती पर कार्य किया जा रहा है और बहुत से मामलों में सफलता भी हाथ लगी है।

उदाहरण के लिए, लखनऊ सेफ सिटी प्रोजेक्ट के तहत चौराहों और महिलाओं की भारी आवाजाही वाले क्षेत्रों में लगभग 700 से अधिक स्मार्ट एआई कैमरे लगाए गए हैं। इनमें से 100 कैमरे चेहरे की पहचान तकनीक से लैस हैं। कुछ कैमरों को संदिग्ध व्यवहार का पता लगाने और अपराध परिदृश्यों की पहचान के लिए प्रशिक्षित किया गया है, जैसे महिलाओं के कॉलेजों और बाजारों के पास लड़कियों या पुरुषों का झुंड बनाकर खड़ा होना, लव-जिहाद की प्रेरित मानसिकता से भरे लोगों द्वारा नाबालिग बच्चियों को बहला-फुसलाकर प्रेम के जाल में फँसाना और धर्म परिवर्तन के लिए बाध्य करना, सार्वजनिक स्थानों पर शराब पीना या फिर एसिड अटैक जैसे असामाजिक कार्यों को अंजाम देने वाले मानसिक रूप से पीड़ित लोगों की पहचान और उचित कार्रवाई करना।

इसके साथ-साथ गौतमबुद्धनगर जैसे कुछ स्थानों पर नाइट विजन और भीड़ विश्लेषण वाले एआई कैमरे लगाए गए हैं, जो संवेदनशील इलाकों में हिंसक व्यवहार को तुरंत ट्रैक कर लेते हैं। इनमें क्राइम जीपीटी और एकीकृत नियंत्रण कक्ष का उपयोग यूपी पुलिस स्टैक टेक्नोलॉजीज के सहयोग से कर रही है। समाज कल्याण विभाग द्वारा वृद्धावस्था पेंशन और पारिवारिक लाभ योजनाओं की निगरानी के लिए एआई का प्रयोग किया जा रहा है। इससे आवेदकों की सटीक जाँच होती है। वाधवानी एआई (Wadhwani AI) जैसी संस्थाओं के साथ साझेदारी की जा रही है, जिससे एआई-संचालित मोबाइल टूल्स के द्वारा नवजात शिशुओं का वजन और शारीरिक विकास मापा जा सके। इन आवश्यक जानकारियों की मदद से भविष्य में स्वास्थ्य संबंधी किसी भी प्रकार की जटिल समस्याओं से बचा जा सके।

प्रोजेक्ट प्रवीण के तहत कक्षा 9वीं से 12वीं तक के वोकेशनल कोर्स में ‘AIफॉर ऑल’ (AI for All) कोर्स को अनिवार्य किया गया है। इसके तहत सरकारी स्कूलों में दो लाख से अधिक बच्चों को एआई टूल्स और कोडिंग की बेसिक शिक्षा मुफ्त दी जा रही है। इसके साथ-साथ स्कूलों और शैक्षणिक संस्थानों के आसपास एआई सीसीटीवी के माध्यम से कड़ी निगरानी की जा रही है, जिससे आज के युवाओं को ड्रग पेडलर्स, मानव देह व्यापार गिरोहों इत्यादि असामाजिक तत्वों से बचाया जा सके।

उत्तर प्रदेश राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, धार्मिक स्थलों और कला परंपराओं को एआई ग्राफिक्स, डिजिटल कला और वीडियो क्लिपिंग के माध्यम से पुनर्जीवित और प्रदर्शित किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग और स्थानीय डिजिटल कलाकारों द्वारा अयोध्या (श्रीराम मंदिर), काशी (वाराणसी के घाट) और मथुरा-वृंदावन के काल्पनिक 3D हाई-डेफिनिशन ग्राफिक्स तैयार किए जा रहे हैं।