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CCSU परीक्षा - आरएसएस को लेकर सवाल से हुआ बवाल

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CCSU परीक्षा - आरएसएस को लेकर सवाल से हुआ बवाल


राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ किसी परिचय का मोहताज नहीं है। विश्व के इस सबसे बड़े सामाजिक संगठन की स्थापना का यह 100 वां वर्ष है। सेवा, समर्पण और  राष्ट्रनिष्ठा की वृत्ति से पिछले 100 वर्ष में इस संगठन ने देश में ही नहीं बल्कि विदेश में भी अपनी पहचान बनाई है। कहते हैं न कि प्रत्येक सकारात्मक शक्ति के विरोध में सदैव कोई न कोई नकारात्मक शक्ति भी कार्य करती है, ऐसा ही RSS के साथ भी है। RSS की बढ़ती प्रतिष्ठा और सामाजिक स्वीकार्यता को समाज में छिपे अनेक दुष्ट तत्व स्वीकार नहीं पा रहे हैं और आज भी अवसर मिलते ही संघ को लेकर विष-वमन करते हैं।


दुःख का विषय यह है कि ऐसे कुत्सित विचारों वाले अनेक तथाकथित बुद्धिजीवी हमारे शिक्षा संस्थानों में भी सक्रिय हैं। 2 अप्रैल 2025 को चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ की राजनीति विज्ञान की एम. ए. द्वितीय वर्ष परीक्षा में RSS को लेकर आपत्तिजनक प्रश्न पूछे गये। एक प्रश्न में आरएसएस को कट्टरपंथी और आतंकी संगठनों के साथ जोड़ा गया था और दूसरे प्रश्न में RSS को धार्मिक एवं जातीय पहचान की राजनीति से जोड़ा गया।



विद्यार्थियों ने इस मामले को गंभीरता से लिया और उनकी कड़ी प्रतिक्रिया के बाद  विश्वविद्यालय समिति ने मामले की जांच कराई। प्रश्नपत्र बनाने वाली प्रो. सीमा पंवार को परीक्षाओं से आजीवन डिबार कर दिया।


विश्वविद्यालय ने अपने स्तर पर अनुशासनात्मक कार्रवाई कर दी है किन्तु सवाल यह है देश के प्रतिष्ठित विश्वव्यापी सामाजिक संगठन को लेकर विद्यार्थियों के मन में गलत तथ्य संप्रेषित करने के पीछे मंशा क्या थी? कहीं यह शिक्षा संस्थानों में घुसपैठ कर चुके देश विरोधी तत्वों का कोई षड्यंत्र तो नहीं?



परीक्षा से पूर्व तैयार प्रश्नपत्रों की जांच नहीं किया जाना भी विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगाता है। शिक्षा संस्थान हमारी  पीढ़ीयों को दिशा देने के लिए हैं, यदि वह विद्यार्थियों को दिग्भ्रमित करेंगे तो उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा धूमिल होगी