सहारनपुर, उत्तर प्रदेश
होली खुशियों और रंगों का त्योहार है, लेकिन आजकल बाजार में मिलने वाले केमिकल रंग सेहत और पर्यावरण दोनों के लिए नुकसानदेह साबित हो रहे हैं। ऐसे में सहारनपुर की एक आत्मनिर्भर गौशाला ने होली को सुरक्षित और प्राकृतिक बनाने की दिशा में एक सराहनीय पहल की है। जी हां, सहारनपुर नगर निगम द्वारा संचालित मां शाकुंभरी कान्हा उपवन गौशाला ने इस बार होली के लिए खास गोमय गुलाल तैयार किया है। यह गुलाल पूरी तरह से प्राकृतिक चीजों से बनाया गया है, ताकि लोगों की सेहत सुरक्षित रहे और पर्यावरण को कोई नुकसान न पहुंचे। इस गुलाल को अरारोट, गाय का शुद्ध गोबर, पालक, चुकंदर और हल्दी जैसे नेचुरल रंगों से तैयार किया गया है। गौशाला ने इस वर्ष पाँच रंगों भगवा, पीला, गुलाबी, हरा और लाल में गोमय गुलाल बनाया है। यह गुलाल केमिकल फ्री है, त्वचा और आंखों के लिए सुरक्षित है और पूरी तरह से बायो-डिग्रेडेबल भी है। यानी होली खेलने के बाद यह प्रकृति को कोई हानि नहीं पहुंचाता।
यह गौशाला प्रदेश
की पहली ऐसी आत्मनिर्भर कान्हा गौशाला है, जो गोमय गुलाल का व्यावसायिक उत्पादन कर रही है। इसका मुख्य उद्देश्य श्रद्धा
के साथ स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को जोड़ते हुए गौशाला को आत्मनिर्भर बनाना
है। गौशाला प्रभारी
और पशु चिकित्सा कल्याण अधिकारी डॉ. संदीप मिश्रा के अनुसार, इस गुलाल की मांग शहर के साथ-साथ ऑनलाइन भी
तेजी से बढ़ रही है। इसी वजह से गौशाला में बड़े पैमाने पर गुलाल तैयार किया जा
रहा है। अभी तक करीब तीन क्विंटल गुलाल बनाया जा चुका है। यह गुलाल 100 ग्राम और
200 ग्राम के आकर्षक पैकेट में उपलब्ध है, जिसकी कीमत ₹40 से शुरू होती है। लोग इसे नगर निगम परिसर, शहर के प्रमुख स्थानों, गौशाला आउटलेट्स और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से भी खरीद सकते हैं।
यह गुलाल फिलहाल पाँच राज्यों में बेचा जा रहा है और इसकी डिमांड लगातार बढ़ रही
है। साथ ही यह गोमय
गुलाल इस वर्ष भी नरेंद्र मोदी, द्रौपदी मुर्मु
और योगी आदित्यनाथ सहित देश की कई प्रमुख हस्तियों को भेजा जाएगा। इस पहल से न केवल
सुरक्षित होली का संदेश जा रहा है, बल्कि आत्मनिर्भर
भारत और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक मजबूत कदम उठाया गया है।



