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पर्यावरण संरक्षण में डॉ. आशुतोष पंत का योगदान

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नैनीताल, उत्तराखण्ड

नैनीताल जिले के हल्द्वानी निवासी डॉ. आशुतोष पंत पिछले कई दशकों से पर्यावरण संरक्षण की दिशा में निरंतर कार्य कर रहे हैं। बिना किसी संस्था, फंड या प्रचार के उन्होंने अपनी निजी आय से अब तक 4 लाख 62 हजार 500 से अधिक पौधे लोगों में वितरित किए हैं। उनका उद्देश्य केवल पौधे बांटना नहीं, बल्कि लोगों के भीतर प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी और संवेदनशीलता का भाव पैदा करना है।

डॉ. पंत गांव-गांव, स्कूलों और सामाजिक कार्यक्रमों में स्वयं पहुंचते हैं और लोगों को पौधारोपण के लिए प्रेरित करते हैं। वे हर व्यक्ति से यह संकल्प भी करवाते हैं कि लगाए गए पौधे की सुरक्षा, नियमित सिंचाई और देखभाल पूरी जिम्मेदारी के साथ की जाएगी। उनका मानना है कि पौधा तभी सार्थक होता है, जब वह जीवित रहकर पेड़ बने।

उन्होंने वर्ष 1988 में आयुर्वेद चिकित्सक के रूप में अपनी सेवा शुरू की थी और उधम सिंह नगर जिले से जिला आयुर्वेद चिकित्साधिकारी पद से सेवानिवृत्त हुए। नौकरी के शुरुआती वर्षों में वे स्वयं पौधारोपण करते थे, लेकिन बाद में उन्होंने महसूस किया कि देखरेख के अभाव में कई पौधे नष्ट हो जाते हैं। इसी अनुभव से सीख लेते हुए वर्ष 1996 से उन्होंने लोगों को फलदार और उपयोगी पौधे भेंट करने का अभियान शुरू किया।

आज उनके द्वारा वितरित किए जाने वाले पौधों में आम, आंवला, तेजपत्ता, सहजन, अखरोट सहित कई आयुर्वेदिक और उपयोगी वृक्ष शामिल हैं। उनका कहना है कि जब किसी पेड़ से फल और प्रत्यक्ष लाभ मिलता है, तो लोग उसे परिवार के सदस्य की तरह संजोकर रखते हैं, न कि काटते हैं।

इस पूरे अभियान की सबसे प्रेरक बात यह है कि इसके पीछे कोई आर्थिक सहयोग नहीं है। पहले वे अपने वेतन से और अब सेवानिवृत्ति के बाद अपनी पेंशन से पौधे खरीदकर दान करते हैं। हर साल इस कार्य में लगभग 5 से 6 लाख रुपये का खर्च आता है, जिसे वे पूरी तरह स्वयं वहन करते हैं।