कौशल से कॅरियर तक, आत्मनिर्भर बन रहा युवा
उत्तर प्रदेश की युवा शक्ति अब केवल नौकरी की तलाश में नहीं है। वह अपने कौशल को अवसर में बदलने और अवसर को रोजगार में बदलने की दिशा में आगे बढ़ रही है। कोई आईटी और डिजिटल सेवाओं में अपनी जगह बना रहा है, कोई पर्यटन और हॉस्पिटैलिटी से जुड़ रहा है, तो कोई पारंपरिक हुनर को आधुनिक तकनीक और बाजार से जोड़कर अपना कारोबार खड़ा कर रहा है। बदलते उत्तर प्रदेश में युवा अब जॉब सीकर से जॉब क्रिएटर बनने की राह पर भी दिखाई दे रहे हैं।
यही बदलाव कौशल विकास को महत्वपूर्ण बनाता है। आज डिग्री के साथ व्यावहारिक दक्षता, डिजिटल समझ, संवाद क्षमता और बदलती तकनीक सीखने की क्षमता भी जरूरी है। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े और युवा राज्य में कौशल विकास केवल रोजगार की योजना नहीं, बल्कि आर्थिक और सामाजिक बदलाव का महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है।
लाखों युवाओं तक पहुंचा कौशल प्रशिक्षण: युवाओं को उद्योगों की जरूरत के अनुरूप तैयार करने के लिए उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन (UPSDM) लगातार काम कर रहा है। राज्य के 2026-27 के बजट के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में UPSDM के माध्यम से 9.25 लाख युवाओं को अल्पकालिक प्रशिक्षण देकर प्रमाणित किया गया है। इनमें 4.22 लाख युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए गए हैं।
ये आंकड़े बताते हैं कि कौशल विकास अब राज्य की रोजगार नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। प्रशिक्षण में कंप्यूटर, इलेक्ट्रिशियन, हेल्थकेयर, रिटेल, ऑटोमोबाइल, हॉस्पिटैलिटी, पर्यटन, ब्यूटी एंड वेलनेस, सिलाई और फैशन डिजाइनिंग जैसे रोजगारपरक क्षेत्रों को शामिल किया गया है।
लेकिन बदलती अर्थव्यवस्था ने कौशल की परिभाषा भी बदल दी है। अब युवाओं को केवल पारंपरिक ट्रेडों में प्रशिक्षित करना पर्याप्त नहीं है। डिजिटल तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा, साइबर सुरक्षा और डिजिटल मार्केटिंग जैसे क्षेत्रों में भी युवाओं की दक्षता बढ़ानी होगी।
जिस जिले की पहचान, उसी क्षेत्र का कौशल: उत्तर प्रदेश में कौशल विकास की एक बड़ी संभावना स्थानीय अर्थव्यवस्था से जुड़ी है। प्रदेश के प्रत्येक जिले की अपनी आर्थिक और सांस्कृतिक पहचान है। यदि युवाओं को उसी स्थानीय अर्थव्यवस्था की जरूरत के अनुसार प्रशिक्षित किया जाए तो रोजगार के साथ-साथ स्थानीय उद्योगों को भी नई ताकत मिल सकती है।
वाराणसी में पर्यटन, वस्त्र और हस्तशिल्प, मुरादाबाद में पीतल उद्योग, भदोही में कालीन, कानपुर में चमड़ा और विनिर्माण, नोएडा में आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स तथा पूर्वांचल में कृषि और खाद्य प्रसंस्करण जैसे क्षेत्र युवाओं के लिए बड़ी संभावनाएं पैदा करते हैं। यानी कौशल विकास का अगला चरण केवल ‘ट्रेनिंग सेंटर तक युवा पहुंचें’ नहीं, बल्कि ‘स्थानीय उद्योग की जरूरत तक प्रशिक्षण पहुंचे’ होना चाहिए।
हुनर से स्वरोजगार की राह: कौशल विकास का सबसे बड़ा प्रभाव तब दिखाई देता है जब प्रशिक्षित युवा नौकरी खोजने के बजाय अपना काम शुरू करने की स्थिति में पहुंचता है। उत्तर प्रदेश में इसी सोच को बढ़ावा देने के लिए वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP), मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना, विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना और मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान (MYUVA) जैसी पहलों को आगे बढ़ाया जा रहा है।
कल्पना कीजिए-किसी युवा को सिलाई का प्रशिक्षण मिलता है और वह अपना छोटी यूनिट शुरू करता है। कोई डिजिटल मार्केटिंग सीखकर स्थानीय दुकानदारों को ऑनलाइन बाजार उपलब्ध कराता है। कोई हस्तशिल्प को ई-कॉमर्स से जोड़ता है। कोई फूड प्रोसेसिंग यूनिट शुरू करता है। ऐसे मामलों में एक प्रशिक्षित युवा केवल अपना रोजगार नहीं बनाता, बल्कि धीरे-धीरे दूसरों के लिए भी रोजगार पैदा कर सकता है। यही वह बिंदु है जहां कौशल, स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता एक-दूसरे से जुड़ते हैं।
गांव के युवा के लिए भी नए अवसर: उत्तर प्रदेश की बड़ी युवा आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है। इसलिए कौशल विकास की असली परीक्षा गांव और छोटे कस्बों में है। कृषि आधारित व्यवसाय, डेयरी, खाद्य प्रसंस्करण, ड्रोन तकनीक, सौर ऊर्जा, मोबाइल रिपेयरिंग, डिजिटल भुगतान, ई-कॉमर्स और स्थानीय पर्यटन जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षण ग्रामीण युवाओं के लिए आय के नए रास्ते खोल सकता है।
इसका एक बड़ा फायदा यह भी होगा कि युवाओं को रोजगार के लिए अनिवार्य रूप से बड़े शहरों की ओर पलायन नहीं करना पड़ेगा। यदि स्थानीय स्तर पर कौशल, पूंजी और बाजार उपलब्ध हो जाएं तो गांव और छोटे शहर भी आर्थिक गतिविधियों के केंद्र बन सकते हैं।
AI के दौर में नया हुनर: कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी AI ने रोजगार की दुनिया को तेजी से बदलना शुरू कर दिया है। आने वाले समय में लगभग हर क्षेत्र में डिजिटल तकनीक का प्रभाव बढ़ेगा। ऐसे में उत्तर प्रदेश के युवाओं के लिए एआई और डिजिटल कौशल सीखना महत्वपूर्ण होगा। एआई का इस्तेमाल केवल सॉफ्टवेयर कंपनियों तक सीमित नहीं है। कृषि में फसल संबंधी जानकारी, स्वास्थ्य सेवाओं में डेटा विश्लेषण, शिक्षा में व्यक्तिगत सीखने की व्यवस्था, पर्यटन में डिजिटल सेवाएं और छोटे कारोबारों में मार्केटिंग जैसे क्षेत्रों में भी इसका उपयोग बढ़ रहा है। इसलिए आज के युवा के लिए सबसे महत्वपूर्ण कौशल शायद कोई एक तकनीक नहीं, बल्कि ‘लगातार सीखते रहने की क्षमता’ है।
डिग्री के साथ हुनर भी: शिक्षा और कौशल को अलग-अलग देखने की बजाय दोनों को साथ लेकर चलना होगा। कॉलेज और विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले युवाओं को भी उद्योग की वास्तविक जरूरतों से परिचित कराना जरूरी है। इंटर्नशिप, अप्रेंटिसशिप, लाइव प्रोजेक्ट, इंडस्ट्री विजिट और रोजगार मेलों को शिक्षा का नियमित हिस्सा बनाया जा सकता है। इससे विद्यार्थी डिग्री हासिल करने के साथ-साथ कार्यस्थल की वास्तविक परिस्थितियों को भी समझ पाएंगे।
तकनीकी और व्यावसायिक शिक्षा से जुड़े विद्यार्थियों के लिए उत्तर प्रदेश का U-Rise डिजिटल प्लेटफॉर्म भी सीखने और करियर के अवसरों को डिजिटल माध्यम से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।
महिलाओं के लिए कौशल का मतलब आत्मनिर्भरता: कौशल विकास में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण है। घर की जिम्मेदारियों के साथ काम करने वाली महिलाओं के लिए डिजिटल वर्क, ई-कॉमर्स, सिलाई, खाद्य प्रसंस्करण, ब्यूटी एवं वेलनेस, हेल्थकेयर और छोटे उद्यमों जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षण आय के नए अवसर पैदा कर सकता है। महिलाओं के लिए सुरक्षित प्रशिक्षण केंद्र, स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षण, डिजिटल साक्षरता और वित्तीय सहायता को साथ लेकर चलना होगा। यदि एक महिला आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होती है तो उसका लाभ केवल उसके परिवार को नहीं, बल्कि पूरी स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलता है।
प्रशिक्षण से आगे-रोजगार की गारंटी जरूरी: कौशल विकास की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि प्रशिक्षण और वास्तविक रोजगार के बीच की दूरी कम हो। किसी युवा को प्रमाणपत्र मिल जाना सफलता का अंतिम पैमाना नहीं हो सकता। असली सफलता तब होगी जब वह प्रशिक्षण के बाद सम्मानजनक और टिकाऊ रोजगार प्राप्त करे या अपना उद्यम शुरू कर सके। इसके लिए उद्योगों को प्रशिक्षण प्रक्रिया से सीधे जोड़ना होगा। कंपनियों की जरूरत के अनुसार पाठ्यक्रम तैयार हों, प्रशिक्षण के दौरान व्यावहारिक काम कराया जाए और प्रशिक्षण पूरा होने के बाद अप्रेंटिसशिप तथा प्लेसमेंट का रास्ता उपलब्ध कराया जाए। इसी तरह प्रशिक्षण के बाद भी युवाओं को कुछ समय तक करियर काउंसलिंग, मेंटरशिप और बाजार की जानकारी उपलब्ध कराना उपयोगी होगा।
अब ‘कौशल’ से ‘सामर्थ्य’ की ओर: उत्तर प्रदेश में कौशल विकास की यात्रा एक महत्वपूर्ण चरण में पहुंच चुकी है। लाखों युवाओं को प्रशिक्षण देने के बाद अब अगला लक्ष्य प्रशिक्षण की गुणवत्ता, रोजगार की स्थिरता और उद्यमिता की सफलता होना चाहिए। जरूरत इस बात की है कि कौशल विकास को शिक्षा, उद्योग, स्टार्टअप, वित्त और बाजार से एक साथ जोड़ा जाए। विश्वविद्यालय विचार दें, प्रशिक्षण संस्थान हुनर विकसित करें, उद्योग रोजगार और अप्रेंटिसशिप दें, सरकार वित्तीय एवं संस्थागत सहयोग उपलब्ध कराए और डिजिटल प्लेटफॉर्म बाजार तक पहुंच बनाने में मदद करें। तभी कौशल विकास एक प्रशिक्षण कार्यक्रम से आगे बढ़कर युवा आर्थिक सशक्तिकरण का आंदोलन बन सकेगा।
युवा शक्ति ही आर्थिक शक्ति: उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी ताकत उसकी युवा आबादी है, लेकिन यह आबादी तभी आर्थिक शक्ति बनेगी जब युवाओं के हाथ में सही कौशल और उनके कौशल के सामने सही अवसर होगा। आज जरूरत ऐसे युवा की है जो केवल नौकरी के लिए आवेदन न करे, बल्कि समस्या को पहचाने और उसका समाधान तलाशे; जो केवल बाजार में रोजगार न खोजे, बल्कि स्थानीय संसाधनों से नया बाजार बनाए; जो तकनीक को केवल इस्तेमाल न करे, बल्कि उसे अपने काम और कारोबार की ताकत बनाए।
कौशलयुक्त युवा उत्तर प्रदेश की नई विकास कहानी का सबसे महत्वपूर्ण पात्र है। यदि प्रशिक्षण की गुणवत्ता, उद्योगों से जुड़ाव, डिजिटल दक्षता, उद्यमिता और रोजगार के अवसरों को एक साथ आगे बढ़ाया जाए, तो उत्तर प्रदेश का युवा न केवल अपने भविष्य को सुरक्षित कर सकता है, बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था को भी नई गति दे सकता है। कौशल से रोजगार, रोजगार से उद्यम और उद्यम से आत्मनिर्भरता, यही उत्तर प्रदेश के युवा की नई विकास यात्रा है।




