लखनऊ, उत्तर प्रदेश
उत्तर प्रदेश में ग्रामीण महिलाओं को
रोजगार और आत्मनिर्भरता से जोड़ने की दिशा में ‘प्रेरणा कैंटीन’ एक अच्छी पहल के
रूप में सामने आई हैं। सरकारी कार्यालयों और स्वास्थ्य केंद्रों में चल रही ये
कैंटीनें स्वयं सहायता समूहों (SHG) से जुड़ी महिलाओं को अपने ही क्षेत्र में काम और कमाई का अवसर
दे रही हैं।
बता दें, प्रदेश में 2,100 से अधिक प्रेरणा कैंटीन संचालित हो रही हैं।
इनके माध्यम से करीब 10,000 ग्रामीण परिवारों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से
आजीविका का सहारा मिलने की बात सामने आई है।
जानकारी के अनुसार, प्रेरणा कैंटीनें विकास भवन, कलेक्ट्रेट, ब्लॉक कार्यालयों के साथ-साथ प्राथमिक
और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में भी संचालित की जा रही हैं। इन स्थानों पर
रोजाना बड़ी संख्या में कर्मचारी, अधिकारी, मरीज और आम लोग आते हैं। इससे कैंटीन
चलाने वाली महिलाओं को अपने आसपास ही नियमित ग्राहक मिल जाते हैं।
महिलाएं बन रही हैं उद्यमी
इन कैंटीनों के माध्यम से महिलाओं को केवल खाना बनाने और बेचने का काम ही नहीं मिल रहा, बल्कि उन्हें व्यवसाय चलाने, हिसाब-किताब रखने और ग्राहकों को बेहतर सेवा देने का अनुभव भी मिल रहा है। सरकार का प्रयास है कि इन कैंटीनों को आगे चलकर ‘मॉडल कैंटीन’ के रूप में विकसित किया जाए, ताकि अधिक से अधिक महिलाएं सफल उद्यमी बन सकें। प्रेरणा कैंटीनों में सरकारी कर्मचारियों, मरीजों और आम लोगों को स्वच्छ, पौष्टिक और किफायती भोजन और नाश्ता उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। इससे लोगों को सुविधाजनक भोजन मिल रहा है और महिलाओं को अपनी मेहनत से आय अर्जित करने का अवसर।
प्रेरणा कैंटीन की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां महिला सशक्तिकरण, रोजगार और जनसेवा एक साथ दिखाई देते हैं। सही अवसर और सहयोग मिलने पर ग्रामीण महिलाएं अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। प्रेरणा कैंटीन आज केवल भोजन उपलब्ध कराने का माध्यम नहीं, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के आत्मविश्वास, रोजगार और आत्मनिर्भरता की नई पहचान बनती जा रही हैं।



