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पुरुष-महिला समानता आज की आवश्यकता है-दत्तात्रेय होसबाले जी

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रांची

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी का रांची आगमन हुआ। इस अवसर पर सामाजिक सद्भाव बैठक का आयोजन किया गया, जिसमें समाज के विभिन्न संगठनों, जाति-बिरादरी एवं समुदायों के 600 से अधिक प्रतिनिधियों ने सहभागिता की। बैठक का उद्देश्य समाज में व्याप्त समसामयिक समस्याओं पर संवाद स्थापित करना तथा सामाजिक समरसता को सुदृढ़ करने के लिए सामूहिक प्रयासों पर विचार करना था।

बैठक के प्रथम सत्र में समाज के विभिन्न समूहों के प्रतिनिधियों ने अपने-अपने क्षेत्रों में किए जा रहे सामाजिक, सांस्कृतिक एवं सेवा कार्यों की जानकारी दी। साथ ही सामने आ रही सामाजिक चुनौतियों को भी साझा किया। इनमें प्रमुख रूप से मतांतरण , घुसपैठ, नशाखोरी, अशिक्षा, अंधविश्वास, परस्पर सहयोग की कमी, और लव-जिहाद जैसी गंभीर समस्याओं का उल्लेख किया गया।


सरकार्यवाह जी ने समाज के प्रतिनिधियों द्वारा उठाए गए प्रश्नों एवं विषयों पर विस्तार से विचार व्यक्त किए। उन्होंने तीन प्रमुख क्षेत्रों का उल्लेख किया - झारखंड का छोटानागपुर क्षेत्र, पूर्वोत्तर राज्यों के जनजातीय क्षेत्र, और दक्षिण भारत के केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना आदि राज्य। उन्होंने कहा कि इन जनजातीय क्षेत्रों में साजिशन चर्च से जुड़े लोगों का प्रवेश कराया गया तथा हिन्दू धर्मगुरुओं को रोकने का प्रयास हुआ। गरीबी, अशिक्षा और अंधविश्वास को धर्मांतरण का प्रमुख कारण बताया।

उन्होंने जनजातीय क्षेत्रों में तथाकथित “3-D समस्या” का उल्लेख किया, जिसमें मतांतरण , डी.जे. संस्कृति और दारू को शामिल बताया। उन्होंने मतांतरण की समस्या को कम करने के उपायों पर कहा कि समाज में परस्पर सहयोग, छुआछूत एवं जातिगत भेदभाव से दूरी, ऊँच-नीच की भावना त्यागने तथा हिन्दू समाज की जनसंख्या सुदृढ़ करने की आवश्यकता है। उन्होंने घर-वापसी के प्रयासों की चर्चा करते हुए कहा कि धर्मजागरण समाज का कार्य है, जिसे समाज को स्वयं करना होगा।

जातिवाद की समस्या पर सरकार्यवाह जी ने कहा कि “हमारा जन्म किस परिवार या जाति में होगा, यह हमारे हाथ में नहीं होता, फिर हम जातिवाद क्यों करते हैं? किसी भी जाति को नीचा या ऊँचा नहीं समझना चाहिए।” उन्होंने कहा कि पुरुष-महिला समानता आज की आवश्यकता है। जब पुरुष और महिलाएँ साथ-साथ कार्य कर रहे हैं, तो उनके बीच असमानता का कोई औचित्य नहीं है।

सरकार्यवाह जी ने कहा कि आज सोशल मीडिया सकारात्मक और नकारात्मक दोनों प्रकार के कंटेंट से भरा हुआ है। बच्चों को इसके नकारात्मक प्रभावों से बचाने के लिए उन्हें भारतीय संस्कृति से जोड़ना आवश्यक है। इसके लिए बच्चों के साथ संवाद की प्रक्रिया अपनाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि बच्चों को मंदिर जाने के लिए प्रेरित करना चाहिए, क्योंकि मंदिर जाने से अहंकार दूर होता है और मन को शांति की प्राप्ति होती है।

स्वामी विवेकानंद जी के जन्मदिवस के अवसर पर उन्हें स्मरण करते हुए दत्तात्रेय होसबाले जी ने भारतीय युवाओं से उनके कथन “Think little less, act little more” को जीवन में अपनाने का आह्वान किया।

उन्होंने हिन्दू समाज के करणीय कार्यों के रूप में निम्न बिंदुओं पर विशेष जोर दिया-सेवा कार्यों का विस्तार, सरकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाना, और गरीबी, अशिक्षा एवं अभावग्रस्तता से प्रभावित लोगों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना। उन्होंने पारसी समुदाय का उदाहरण देते हुए “मेहनत के बल पर आगे बढ़ने” की बात कही और बताया कि आजादी के समय पारसी समाज ने सरकार से किसी प्रकार के आरक्षण की माँग नहीं की थी। उन्होंने दिव्यांग बच्चों को समाज के आर्थिक रूप से सक्षम परिवारों द्वारा गोद लेने का आग्रह किया तथा समाज के विभिन्न समूहों से ऐसे बच्चों की सहायता करने की अपील की।

बांग्लादेशी घुसपैठ के विषय पर उन्होंने कहा कि घुसपैठ के माध्यम से लंबे समय तक राजनीतिक लाभ उठाया जाता रहा है। आज बांग्लादेश में हिन्दुओं की स्थिति किसी से छिपी नहीं है। सीमा पर फेंसिंग एक बड़ी चुनौती है और कई बार हमारे ही लोग घुसपैठियों को शरण देते हैं। सरकार SIR सहित विभिन्न माध्यमों से इस समस्या के समाधान हेतु प्रयास कर रही है।

सरकार्यवाह जी ने हिन्दू समाज के विभिन्न समूहों के प्रतिनिधियों से अपने-अपने समुदाय के विकास के साथ-साथ आपसी सहयोग बढ़ाने का आग्रह किया। उन्होंने एक-दूसरे के कार्यक्रमों में सहभागिता, परस्पर आदर-सम्मान, कमजोर समुदायों की सहायता तथा “हम सभी हिन्दू हैं,” इस भाव को सदैव स्मरण रखने का आह्वान किया।


संत महात्मा बैठक

बैठक में उपस्थित झारखंड प्रांत के 78 से अधिक संतों के साथ आध्यात्मिक-धार्मिक विषयों पर चर्चा की। बैठक में धारा 342 पर चर्चा हुई, जिसमें धर्मांतरण के उपरांत जनजाति वर्ग के स्टेटस में कोई बदलाव नहीं आता, तथा धर्मांतरण के उपरांत ईसाई या मुस्लिम बनने के बाद भी जनजातियों को प्रदत्त सुविधाओं का लाभ मिलता रहता है। अगर इस धारा को समाप्त कर दिया जाए तो धर्मांतरण बहुत हद तक समाप्त हो जाएगा। बैठक में गुरुकुल की स्थापना जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई।

सामाजिक अध्यात्मिक संगठन बैठक

समाज की सामाजिक, आध्यात्मिक संस्थाओं ने सेवा, साहित्य, कला, धार्मिक आदि क्षेत्रों में कार्य किया है। हजारों वर्षों से यह परम्परा चली आ रही है। ऐसा एक महान लक्ष्य को ध्यान में रखकर किया गया है। सरकारें भी कई कार्यों में योगदान देती रही हैं। लेकिन बहुत सारे करणीय कार्य परिवार के भी होते हैं, जैसे अपने बच्चों को संस्कार देना, उन्हें बड़े-बुजुर्गों का आदर करना सिखाना आदि। समाज की एकता आवश्यक है। जंजीर की प्रत्येक कड़ी स्वयं मजबूत रहे और एक कड़ी दूसरी कड़ी से जुड़ी रहे, यह आवश्यक है। सरकार के समक्ष याचना की स्थिति में हमारे युवा न रहें, ऐसे समाज के निर्माण पर बल देना चाहिए।

भारत का विभिन्न क्षेत्रों में आगे बढ़ना जारी है, लेकिन स्लम की समस्या, पर्यावरण की समस्या, आदि सामाजिक अभाव को परिलक्षित करते हैं। सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करनी चाहिए। विदेशों की व्यवस्था से तुलना कर अपने यहाँ सुधार की बात कर सकते हैं। अतः भारत को आर्थिक दृष्टि से मजबूत बनाना तो आवश्यक है, लेकिन ऊपर सुझाए विभिन्न सामाजिक–आध्यात्मिक मसलों पर भी मजबूती की उतनी ही आवश्यकता है।