हरिद्वार, उत्तराखण्ड
कुंभ भारतीय सनातन संस्कृति, आस्था और आध्यात्मिक परंपरा का एक अद्भुत प्रतीक है। गंगा की पावन धारा और संतों के सान्निध्य में हरिद्वार में आयोजित होने वाला अर्धकुंभ लाखों श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखता है। इस भव्य धार्मिक आयोजन को दिव्य, सुव्यवस्थित और यादगार बनाने के लिए उत्तराखण्ड में मेला प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। मेला प्रशासन की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, 14 जनवरी यानी मकर संक्रांति से 20 अप्रैल यानी चैत्र पूर्णिमा तक कुल 11 अमृत स्नान आयोजित किए जाएंगे। इन स्नानों में देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं को गंगा में पुण्य स्नान का अवसर मिलेगा।
उत्तराखण्ड की समृद्ध लोक संस्कृति और प्राचीन देव परंपरा को दर्शाने वाली देवी-देवताओं की पालकियां, जिन्हें देव डोलियां कहा जाता है, इस आयोजन का विशेष आकर्षण होंगी। विभिन्न क्षेत्रों से आने वाली देव डोलियों का भव्य गंगा स्नान 15 मार्च को संपन्न होगा। यह आयोजन उत्तराखंड की धार्मिक विरासत और लोक आस्था को एक साथ प्रस्तुत करेगा। अपर मेलाधिकारी दयानंद सरस्वती की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में देव डोली शोभायात्रा, श्रद्धालुओं की सुविधाओं और व्यवस्थाओं को लेकर विस्तार से चर्चा की गई।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि हरिद्वार में कुंभ और अर्धकुंभ के स्वरूप को लेकर संत समाज का मार्गदर्शन महत्वपूर्ण है। उन्होंने इस आयोजन को सनातन संस्कृति और हिंदुत्व की आस्था का सांस्कृतिक संगम बताते हुए इसे पूरी भव्यता के साथ आयोजित करने की बात कही। हरिद्वार का यह धार्मिक आयोजन न केवल श्रद्धालुओं की आस्था को नई ऊर्जा देगा, बल्कि उत्तराखंड की देव परंपरा, भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत को भी देश-दुनिया के सामने प्रस्तुत करेगा।



