नागौर, जोधपुर
विद्या भारती संस्थान के नवनिर्मित भवन ‘माधव निलयम’ का लोकार्पण राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सह प्रचारक प्रमुख अरुण जैन जी ने किया। उन्होंने संघ की सौ वर्षों की यात्रा, हिन्दू समाज की एकजुटता और पारिवारिक मूल्यों के संरक्षण पर विशेष बल दिया।
उन्होंने कहा कि 1925 में डॉ. हेडगेवार जी ने जिस ध्येय के साथ संघ की स्थापना की थी, आज वह वटवृक्ष बनकर पूरे समाज में व्याप्त है। समाज स्वयं ही अपने में सुधार ला सकता है। सामाजिक सुधार के लिए हमें किसी बड़े व्यक्ति या ताकत को देखने की आवश्यकता नहीं है। हिन्दू समाज को विधर्मी तत्वों से बचाने की जिम्मेदारी स्वयं समाज को ही लेने होगी। उन्होंने रेखांकित किया कि संघ और हिन्दू समाज दो अलग इकाइयाँ नहीं हैं। उन्होंने इतिहास का स्मरण कराते हुए कहा कि भारत की हजार वर्षों की गुलामी का कारण विदेशी आक्रांताओं की शक्ति नहीं, बल्कि हमारे अपने समाज का असंगठित होना था। यदि भारत को पुनः विश्व गुरु के स्थान पर प्रतिष्ठित करना है तो हिन्दू समाज को अपने स्वार्थों का त्याग कर राष्ट्रहित के लिए संगठित होना होगा। हिन्दू समाज जब-जब कमजोर हुआ, तब-तब हमारे देवताओं के मंदिर टूटे। आज जब हिन्दू समाज ने पुनः अपनी शक्ति को पहचान कर संगठित होकर एक दिशा में बढ़ने का तय कर लिया है तो भव्य राम मंदिर हमारे सामने खड़ा है।
सांस्कृतिक हमले और विदेशी षड्यंत्रों के प्रति चेतावनी
अरुण जैन जी ने समाज को वैश्विक षड्यंत्रों के प्रति सचेत करते हुए कहा कि चीन और अमेरिका जैसी शक्तियाँ भारत को आंतरिक रूप से कमजोर करने का प्रयास कर रही हैं। जातियों के बीच भेदभाव पैदा करने वाले ‘व्हाट्सएप ग्रुप’ और ‘भ्रामक विमर्श’ से सावधान रहने की अपील की। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे विदेशी ताकतों द्वारा भारतीय युवाओं को भ्रमित कर देश की संपत्ति को नुकसान पहुँचाने का प्रयास किया गया।
उन्होंने रामसेतु आंदोलन की सफलता का उल्लेख करते हुए बताया कि कैसे हिन्दू समाज की एकजुटता ने देश को सामरिक दृष्टि से सुरक्षित किया। आज भारत परमाणु ईंधन (यूरिनियम) के क्षेत्र में स्वावलंबी बना है, तो उसके पीछे समाज की वही शक्ति है, जिसने सेतु समुद्रम परियोजना के माध्यम से रामसेतु को टूटने से बचाया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब समाज जागरूक होता है तो सरकारें भी राष्ट्र और संस्कृति के अनुकूल निर्णय लेने को बाध्य होती हैं।
मुख्य वक्ता ने चिंता व्यक्त की कि आधुनिकता के नाम पर हम अपनी मातृभाषा, खान-पान और संस्कारों को भूल रहे हैं। माताओं-बहनों से आग्रह किया कि बच्चों को घर में अपनी स्थानीय बोली (मारवाड़ी आदि) सिखाएं और विदेशी संस्कृति के अंधानुकरण से बचें। उन्होंने कहा कि ‘नमस्ते संबोधन’ और ‘दीपक प्रज्ज्वलित करना’ जैसी हमारी परंपराएं वैज्ञानिक हैं, जबकि पश्चिमी सभ्यता का प्रभाव हमें अपनी जड़ों से काट रहा है। ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ का विचार हमारे व्यवहार और परिवारों से ही क्रियान्वित होता है।
उन्होंने कार्यकर्ताओं से सादगी, प्रामाणिकता और संघर्षशीलता बनाए रखने का आग्रह किया। उन्होंने ‘माधव निलयम’ को केवल एक भवन नहीं, बल्कि समाज के लिए प्रेरणा का केंद्र बनाने का संकल्प दिलाया।
पांचला सिद्धा आश्रम के महंत योगी सूरजनाथ महाराज जी ने कहा कि संघ अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूराण कर चुका है। स्वतंत्रता के बाद समाज सुधार और राष्ट्र निर्माण का जो बड़ा कार्य किसी संगठन ने किया है, वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने किया है। डॉक्टर हेडगेवार द्वारा स्थापना किए जाने के बाद एक छोटे से वृक्ष के रूप में संघ का प्रारंभ हुआ था। आज संपूर्ण विश्व में हमारे सनातन धर्म की जो पहचान है, वह संघ के माध्यम से होती है। संघ के कार्यों को पूरा विश्व मानता है कि यह हिन्दू धर्म का एक ऐसा संगठन है जो मानव कल्याण, पर्यावरण संरक्षण और संपूर्ण मानव जाति के मंगल के बारे में सोचता है।
उन्होंने कहा कि डॉ. हेडगेवार जी ने जो दृष्टि और विचार दिया, उन्हें समाज में स्थापित करने का कार्य स्वयंसेवकों ने किया है। हम इसका अनुमान भी नहीं लगा सकते कि एक व्यक्ति द्वारा प्रारंभ किया गया यह विचार आज संपूर्ण विश्व में एक सकारात्मक बदलाव और संगठन के रूप में आगे बढ़ रहा है।
समाज से यही आग्रह है कि संघ ने जिस परिकल्पना के साथ शताब्दी वर्ष में पंच प्रण लिए हैं, यदि हम उन्हें समाज में स्थापित कर दें तो यह हमारे राष्ट्र की मजबूती, मानव जाति के कल्याण और पर्यावरण संरक्षण के लिए बहुत बड़ा कदम होगा। हमें सामूहिक रूप से सद्भावना और सामाजिक समरसता पर विचार करते हुए इस कार्य को आगे बढ़ाना है।
हिन्दू धर्म और अपनी संस्कृति की मजबूती के लिए जब हम सामूहिक रूप से कार्य करेंगे तो निश्चित ही श्रेष्ठ परिणाम आएंगे। हमें गौ माता के प्रति जागृति लानी होगी। देश में गौ-हत्या बंद होनी चाहिए। गौ माता, देवताओं और प्रकृति का आशीर्वाद मिलने से हमारा समाज और धर्म मजबूत होगा।
नागौर जिला संघचालक मुकेश भाटी ने आभार ज्ञापित किया। नागौर विभाग कार्यवाह संजय सोनी ने कार्यक्रम की भूमिका रखी। कार्यक्रम का संचालन जिला कार्यवाह दिलीप शर्मा व विभाग प्रचारक गिरधारी लाल ने किया।



