लंदन चुनावों में भारतीयों का दमदार प्रदर्शन
लंदन के स्थानीय निकाय चुनावों में ‘ब्रिटिश हिंदू इंडियन डायस्पोरा कम्युनिटी’ के 241 प्रतिनिधियों का विभिन्न नगरपालिकाओं में चुना जाना भारतीय मूल के समुदाय की बढ़ती भागीदारी, प्रभाव और सांस्कृतिक पहचान को दर्शाता है।
सनातन अस्मिता और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों की गूंज अब केवल भारत तक सीमित नहीं रही, बल्कि विश्व के बड़े देशों में भी उसका प्रभाव स्पष्ट दिखाई देने लगा है। हाल ही में लंदन में हुए स्थानीय निकाय चुनावों ने यह साबित कर दिया कि भारतीय मूल का हिंदू समाज अब वहां केवल आर्थिक और सामाजिक क्षेत्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि राजनीतिक रूप से भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहा है।
7 मई को लंदन की 32 नगरपालिकाओं में हुए चुनावों में ‘ब्रिटिश हिंदू इंडियन डायस्पोरा कम्युनिटी’ के 241 प्रतिनिधि निर्वाचित होकर विभिन्न परिषदों में पहुंचे हैं। कुल 1817 काउंसलर पदों के लिए चुनाव हुए थे, जिनमें इस समुदाय ने लगभग 900 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे। सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि ये प्रतिनिधि अलग-अलग राजनीतिक दलों से जीतकर आए हैं। कंजर्वेटिव पार्टी से 86, लेबर पार्टी से 96, लिबरल डेमोक्रेट्स से 30, रिफॉर्म यूके से 17, ग्रीन पार्टी से 10 तथा दो उम्मीदवार स्वतंत्र रूप से विजयी हुए। यह दर्शाता है कि भारतीय मूल के हिंदू मतदाता और प्रतिनिधि अब किसी एक दल तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ब्रिटिश राजनीति की मुख्यधारा में प्रभावशाली भूमिका निभा रहे हैं।
कई वार्डों में तो पूरी की पूरी परिषद भारतीय मूल के हिंदू प्रतिनिधियों के हाथ में पहुंच गई। ब्रेंट नगरपालिका क्षेत्र के क्वींसबरी वार्ड से चुने गए तीनों काउंसलर भारतीय मूल के हैं। इनमें मनोज मिश्र, कांता मिस्त्री और जयंती पटेल प्रमुख हैं। उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के मूल निवासी मनोज मिश्र वर्ष 2001 में आईटी क्षेत्र में काम करने के लिए लंदन गए थे। वर्षों तक बैंकिंग क्षेत्र में कार्य करने के बाद उन्होंने सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी शुरू की। 2022 में मात्र 15 मतों से हारने के बावजूद उन्होंने जनता से जुड़ाव बनाए रखा और अंततः इस बार 2163 मत प्राप्त कर जीत हासिल की।
यह सफलता केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि भारतीय समुदाय की सामाजिक विश्वसनीयता का भी प्रमाण है। सड़क, पार्क, फुटपाथ, वृद्धों और बच्चों की देखभाल जैसे स्थानीय कार्यों में भारतीय समुदाय की सक्रियता और समर्पण ने लोगों का विश्वास जीता है। यही कारण है कि लंदन जैसे बहुसांस्कृतिक शहर में भी सनातन मूल्यों और भारतीय पहचान की स्वीकार्यता तेजी से बढ़ रही है।
मनोज मिश्र बताते हैं कि लंदन की नगरपालिकाएं भारत के महानगरों की तरह सड़क, फुटपाथ, पार्कों की देखरेख, आवासीय योजनाओं, तथा वृद्धों और बच्चों की सामाजिक सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण कार्यों की जिम्मेदारी संभालती हैं। उनके अनुसार, भारतीय समुदाय के लोग इन दायित्वों को अत्यंत तन्मयता, अनुशासन और सेवा-भाव से निभाते हैं। यही कारण है कि स्थानीय निवासियों के बीच हिंदू इंडियन डायस्पोरा कम्युनिटी के प्रति विश्वास लगातार मजबूत हो रहा है। भारतीय मूल के प्रतिनिधि केवल सांस्कृतिक पहचान तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे प्रशासनिक दक्षता, पारदर्शिता और जनसेवा के माध्यम से भी अपनी अलग पहचान बना रहे हैं।



