देहरादून, उत्तराखण्ड
विश्वभर में प्रसिद्ध केदारनाथ धाम करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र
है। हर वर्ष लाखों श्रद्धालु बाबा केदार के दर्शन और आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए
यहां पहुंचते हैं। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आगमन के कारण धाम की स्वच्छता
और पर्यावरण को सुरक्षित रखना सभी की जिम्मेदारी बन जाती है। इसी जिम्मेदारी को
ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन ने 'कैरी मी बैक
पॉलिसी' नाम से एक अनूठी पहल शुरू की है। इस अभियान का उद्देश्य केवल सफाई
करना नहीं, बल्कि हर श्रद्धालु को स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण का सहभागी बनाना
है।
बता दें, इस पहल के तहत केदारनाथ धाम पहुंचने
वाले श्रद्धालुओं को विशेष बैग उपलब्ध कराए जाते हैं। श्रद्धालु धाम परिसर और
आसपास से सूखा कूड़ा एकत्र करके इन बैगों में रखते हैं और वापस लौटते समय इसे अपने
साथ गौरीकुंड तक लाते हैं। इसके बाद इस कूड़े का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण किया
जाता है।
हालांकि, इस अभियान के तहत अब तक लगभग 7 टन सूखे
कूड़े का संग्रहण और सुरक्षित निस्तारण किया जा चुका है। इसमें प्लास्टिक की
बोतलें, खाद्य पदार्थों के रैपर, पैकेजिंग
सामग्री और अन्य गैर-जैविक कचरा शामिल है। इस पहल से केदारनाथ धाम की स्वच्छता
बनाए रखने में बड़ी सफलता मिली है।
इस अभियान की सफलता में प्रशासन, नगर पंचायत
केदारनाथ, सामाजिक संस्थाओं और श्रद्धालुओं की भागीदारी महत्वपूर्ण भूमिका निभा
रही है। सबसे अच्छी बात यह है कि श्रद्धालु अब केवल दर्शन करने वाले नहीं, बल्कि
धाम की स्वच्छता के प्रहरी भी बन रहे हैं। केदारनाथ की यात्रा केवल आस्था और
श्रद्धा की यात्रा नहीं है, बल्कि प्रकृति और पर्यावरण के प्रति अपनी
जिम्मेदारी निभाने का अवसर भी है। यदि प्रत्येक व्यक्ति स्वच्छता को अपनी आदत और
जिम्मेदारी बना ले, तो हर धार्मिक स्थल स्वच्छ, सुंदर और
सुरक्षित रह सकता है।
सच्ची श्रद्धा वही है, जिसमें भगवान के
प्रति भक्ति के साथ-साथ उनकी बनाई हुई प्रकृति की रक्षा का भाव भी हो। स्वच्छ धाम, स्वच्छ
वातावरण और सुरक्षित भविष्य के लिए हम सभी को अपना योगदान देना चाहिए।



