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भारत को जानो, भारत को मानो, भारत को बनाओ और भारत के बनो – भय्याजी जोशी

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झिरी, राजगढ़़

देशभर में संस्कृत संभाषण के लिए पहचान बना चुका राजगढ़ जिले का संस्कृत ग्राम झिरी अब ग्राम विकास की गतिविधियों के लिए भी उदाहरण बन रहा है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ग्राम विकास गतिविधि के अंतर्गत प्रभात ग्राम के रूप में विकसित हो रहे झिरी में भय्याजी जोशी का 5 से 7 अगस्त तक तीन दिवसीय प्रवास हुआ। इस दौरान उन्होंने मातृशक्ति, युवाओं और ग्राम विकास समिति के साथ बैठक कर ग्राम के सर्वांगीण विकास, संस्कार, शिक्षा, पर्यावरण, सामाजिक समरसता और आत्मनिर्भरता जैसे विषयों पर संवाद किया।

ग्राम में प्रवेश के दौरान ग्रामवासियों ने संस्कृत भाषा में जयघोष के साथ स्वागत किया। तीन दिवसीय प्रवास के दौरान ग्राम विकास समिति की बैठक, मातृशक्ति एवं युवाओं के साथ संवाद तथा ग्रामोत्सव सहित विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए।

मातृशक्ति के साथ संवाद में भय्याजी जोशी ने माताओं से अपने बच्चों को संस्कारयुक्त और देशभक्त नागरिक बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि परिवार ही बालक के व्यक्तित्व निर्माण की पहली पाठशाला है। परिवार में मिलने वाले संस्कार ही आगे चलकर समाज और राष्ट्र के निर्माण में भूमिका निभाते हैं।

युवाओं के साथ संवाद में उन्होंने कहा कि आज की तरुणाई देश को उच्च स्तर पर ले जाने की क्षमता रखती है। विज्ञान, तकनीक, कृषि, अंतरिक्ष, सुरक्षा और खेल सहित प्रत्येक क्षेत्र में युवाओं ने देश का परचम विश्व में लहराया है। युवाओं के भीतर राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी का भाव जागृत होना आवश्यक है।

“देश हमें देता है सब कुछ, हम भी तो कुछ देना सीखें।” उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपने जीवन में “भारत को जानो, भारत को मानो, भारत को बनाओ और भारत के बनो” के भाव को अपनाएं। प्रत्येक व्यक्ति अपने-अपने कार्यक्षेत्र में राष्ट्र निर्माण के लिए योगदान देगा तो भारत निश्चित रूप से परम वैभव की ओर आगे बढ़ेगा।

गांव को परिवार, संस्कार, शिक्षा और पर्यावरण से युक्त बनाना

ग्राम विकास समिति की बैठक में भय्याजी जोशी ने कहा कि देश का वास्तविक स्वरूप गांवों में बसता है। भारत माता को ग्रामवासिनी और भारत को कृषि प्रधान देश कहा गया है, जबकि किसान को अन्नदाता का सम्मान प्राप्त है। इसलिए गांवों का विकास ही राष्ट्र के विकास की आधारशिला है। गांव को अधिक उन्नत और खुशहाल बनाने के लिए उसे पांच विशेषताओं से युक्त बनाना होगा। उन्होंने परिवार युक्त, संस्कार युक्त, शिक्षा युक्त और पर्यावरण युक्त गांव बनाने पर जोर दिया तथा कहा कि ऐसा गांव विकसित किया जाए, जिसे देखने और उससे सीखने के लिए दूसरे गांवों के लोग आएं।

ग्रामोत्सव में दिखी ग्रामीण जीवन की झलक

ग्राम विकास समिति द्वारा आयोजित ग्रामोत्सव में ग्रामीण जीवन और पारंपरिक गतिविधियों की झलक देखने को मिली। ग्राम की महिलाओं ने छाछ बनाने, चक्की पीसने सहित पुराने ग्रामीण जीवन से जुड़े विभिन्न क्रियाकलापों का मंचन किया। कार्यक्रम में संस्कृत भाषा में रंगमंचीय प्रस्तुतियां भी हुईं। इस अवसर पर ग्राम की विभिन्न प्रतिभाओं का सम्मान किया गया। सम्मान समारोह में कार्यक्रम अध्यक्ष पंचमुखी हनुमान मंदिर उदासीन आश्रम के महंत डॉ. महेशानंद जी महाराज उपस्थित रहे।

हिन्दू पहचान के साथ हिन्दू आचरण वाला गांव बनाएं

ग्रामोत्सव में भय्याजी जोशी ने कहा कि ग्राम विकास केवल योजनाओं से नहीं होगा, बल्कि गांव की वास्तविक समस्याओं को चिन्हित कर उनके समाधान की दिशा में आगे बढ़ना होगा। हमारा गांव केवल हिन्दू पहचान वाला ही नहीं, बल्कि हिन्दू आचरण वाला भी होना चाहिए। उन्होंने गांवों को चार बुराइयों से मुक्त बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि हमारा गांव विवाद मुक्त, गंदगी मुक्त, नशा मुक्त और भेदभाव मुक्त होना चाहिए। उन्होंने कहा कि भेदभाव मुक्त गांव और भेदभाव मुक्त हिन्दू समाज के निर्माण के लिए सभी को मिलकर काम करना होगा। नशा और व्यसन मुक्त समाज का निर्माण होने पर ही समाज अन्य बुराइयों से प्रभावी ढंग से लड़ सकेगा।

उन्होंने कहा कि भूमि को सुजलाम-सुफलाम बनाने के लिए प्राकृतिक और गौ आधारित कृषि पद्धतियों को अपनाने की दिशा में काम करना चाहिए। गौमाता के गोमूत्र और गोबर से निर्मित उत्पादों के माध्यम से कृषि को अधिक प्राकृतिक और टिकाऊ बनाने पर बल दिया।

उन्होंने संविधान की प्रस्तावना में प्रयुक्त “हम भारत के लोग” शब्दों का संदर्भ दिया। उन्होंने कहा कि इसमें हमें किसी प्रांत, भाषा या जाति के आधार पर अलग नहीं किया गया है। हम सभी भारत के लोग हैं और इसी एकात्म भाव के कारण हम भारत माता की जय का उद्घोष करते हैं।

उन्होंने कहा कि भारत का स्वर्णिम इतिहास रहा है और अब देश विश्व में आगे बढ़ रहा है। दुनिया भारत को सम्मान की दृष्टि से देख रही है। ऐसे समय में भारत के गौरवशाली इतिहास का अगला अध्याय लिखने की जिम्मेदारी समाज की है। सभी मिलकर भारत का “सातवां स्वर्णिम पृष्ठ” लिखने के संकल्प के साथ आगे बढ़ें। ऐसा शक्तिशाली, समृद्ध और संस्कारित भारत बनाना है जो विश्व का नेतृत्व करने में सक्षम हो और जिसे कोई पराजित न कर सके।

उन्होंने कहा कि सज्जन लोगों को शक्तिशाली बनना चाहिए और शक्तिशाली समाज को सज्जन बनना चाहिए। तभी भारत माता विश्वगुरु बनेगी। राष्ट्रभक्ति केवल नारों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। “वंदेमातरम्” कहने के साथ उसके भाव को अपने आचरण में भी उतारना होगा। उन्होंने ग्रामवासियों से ग्राम विकास और सामाजिक परिवर्तन के लिए संकल्प लेकर निरंतर कार्य करने का आह्वान किया।