नैनीताल, उत्तराखण्ड
देवभूमि उत्तराखण्ड की पहचान उसकी पवित्र भूमि,
प्राचीन मंदिरों,
सनातन संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं
से है। यहां की नदियां केवल जल का स्रोत नहीं, बल्कि हमारी सभ्यता, संस्कृति और धार्मिक आस्था की जीवनधारा हैं। सनातन धर्म में
नदियों को मां का दर्जा दिया गया है। यही कारण है कि मां कोसी के प्रति भी लोगों
के मन में गहरी श्रद्धा और भक्ति का भाव है।
रामनगर स्थित प्रसिद्ध मां गिरिजा देवी
मंदिर के निकट कोसी नदी के तट पर पहली बार भव्य महाआरती का आयोजन किया गया। गंगा
आरती की तर्ज पर आयोजित इस धार्मिक कार्यक्रम ने क्षेत्र में सनातन संस्कृति,
आध्यात्मिक चेतना और धार्मिक पर्यटन को
बढ़ावा देने की दिशा में एक नई पहल की।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह
धामी ने वर्चुअल माध्यम से श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि देवभूमि
उत्तराखण्ड की पहचान हमारी आस्था, आध्यात्मिक
परंपराओं और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से है। मां कोसी और मां गिरिजा देवी के
प्रति श्रद्धालुओं की अटूट आस्था हमारी सनातन परंपराओं को और अधिक मजबूत बनाती है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे धार्मिक
आयोजन नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने, समाज में सद्भाव बढ़ाने और प्रकृति के प्रति सम्मान की भावना
विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। मां कोसी के पावन तट से स्वच्छता,
सद्भाव, सेवा और पर्यावरण संरक्षण का संदेश पूरे प्रदेश में पहुंचना
चाहिए।
सनातन संस्कृति में नदियां केवल प्रकृति का उपहार नहीं, बल्कि जीवन, आस्था और लोककल्याण की प्रतीक हैं। मां कोसी की महाआरती इसी प्राचीन परंपरा को आगे बढ़ाने का एक प्रयास है। ऐसे आयोजन हमें याद दिलाते हैं कि अपनी संस्कृति और धार्मिक विरासत का सम्मान करने के साथ-साथ नदियों को स्वच्छ रखना और प्रकृति की रक्षा करना भी हमारा नैतिक कर्तव्य है।



