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स्व-बोध से ही भारत विश्व का दीपस्तंभ बनेगा – डॉ. मनमोहन वैद्य जी

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 पुणे

संघ शताब्दी वर्ष के निमित्त पर्वती भाग में चंद्रशेखर आगाशे महाविद्यालय में आयोजित ‘संघ शताब्दी मंथन’ में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय कार्यकारिणी के सदस्य डॉ. मनमोहन वैद्य जी ने कहा कि “हमारा देश प्राचीन काल से उद्योग प्रधान था। वस्त्र, धातु और रसायन जैसे विभिन्न क्षेत्रों में वैश्विक बाजार में भारत का वर्चस्व था। एक देश के दो नाम होना विश्व के में कहीं भी नहीं होता है, इसलिए  ‘इंडिया’ नहीं बल्कि ‘भारत’ ही हमारी सच्ची और गौरवशाली पहचान है। इसी ‘स्व-बोध’ और सेवाभाव के द्वारा भारत आगामी समय में विश्व का दीपस्तंभ बनेगा”।

संवाद कार्यक्रम का उद्देश्य समाज के सभी वर्गों तक पहुँच कर भारतीय नागरिकों को समाज हित में सक्रिय करना तथा संवैधानिक कर्तव्यों का बोध कराना, रहा।

मनमोहन वैद्य जी ने कहा कि भारत का औद्योगिक वैभव कितना बड़ा था, इसका उल्लेख डॉ. राजेंद्र प्रसाद जी ने सोमनाथ मंदिर के उद्घाटन के समय किया था। हमारी संस्कृति एक है, लेकिन उत्सव विभिन्न हैं। कोरोना संकट के दौरान संपूर्ण विश्व ने भारत की आध्यात्मिक शक्ति का अनुभव किया।  अपने प्राणों की परवाह किए बिना सामान्य नागरिक जिस तरह से सेवा कार्य के लिए बाहर निकले, वह राष्ट्र के जीवंत होने का प्रत्यक्ष उदाहरण है।

संजय कुलकर्णी जी ने ‘पंच परिवर्तन’ विषय पर कहा, “आज पश्चिमी देशों में परिवार व्यवस्था टूट चुकी है। कम्युनिस्ट मेनिफेस्टो में भी इस व्यवस्था को समाप्त करने की टिप्पणी की गई थी। समय की मांग है कि भारत को अपने पारिवारिक मूल्यों का जतन करना चाहिए। झाड़ू को भी नमन कर कृतज्ञता व्यक्त करने वाली हमारी महान संस्कृति है”। उन्होंने पर्यावरण की रक्षा के लिए पानी की बचत और प्लास्टिक का उपयोग टालने का आह्वान किया। साथ ही सामाजिक समरसता को बढ़ाने हेतु घरेलू कामगारों से सम्मान से बर्ताव करना तथा सामाजिक नैतिकता के रूप में यातायात के नियमों का कठोरता से पालन करना आवश्यक है। कार्यक्रम में पर्वती भाग के गणमान्य नागरिक, संघ स्वयंसेवक तथा विभिन्न क्षेत्रों से मान्यवर उपस्थित थे।