युवा होनहारों ने सफलता के झंडे गाड़े
उत्तर प्रदेश में युवाओं की एक ऐसी तस्वीर भी है, जो खेतों,छोटे कस्बों, विद्यालयों, खेल मैदानों और सामाजिक अभियानों में दिखाई देती है। यहां का युवा अब केवल नौकरी की तलाश करने वाला वर्ग नहीं रह गया है। वह खेती में नए प्रयोग कर रहा है, विज्ञान को रोजमर्रा की समस्याओं से जोड़ रहा है, खेलों में देश का प्रतिनिधित्व कर रहा है और समाज के लिए काम कर रहा है।
बाराबंकी की पूजा पाल: समस्या से निकला वैज्ञानिक समाधान - बाराबंकी की पूजा पाल की कहानी बताती है कि नवाचार के लिए महंगी प्रयोगशाला हमेशा जरूरी नहीं होती। कक्षा आठ में पढ़ते समय उन्होंने देखा कि गांव के पास चलने वाली थ्रेशर मशीन से निकलने वाली धूल बच्चों और आसपास के लोगों के लिए परेशानी पैदा करती है। इसी अनुभव से उन्होंने धूल रहित थ्रेशर का मॉडल तैयार किया। स्थानीय सामग्री से बनाए गए इस मॉडल का उद्देश्य थ्रेशिंग के दौरान उड़ने वाली भूसी और धूल को अलग करना था। पूजा का मॉडल इंस्पायर अवार्ड मानक की राष्ट्रीय प्रतियोगिता तक पहुंचा और उन्हें जापान के साकुरा साइंस हाई स्कूल कार्यक्रम में भाग लेने का अवसर मिला। 2025 में उन्हें प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार भी मिला। उनकी कहानी का संदेश है कि नवाचार की शुरुआत जिज्ञासा और अपने आसपास की समस्या को पहचानने से होती है।
प्रवीण कुमार: सीमाओं से आगे बढ़ता खेल का हौसला- गौतम बुद्ध नगर के जेवर क्षेत्र के प्रवीण कुमार ने पैरा-एथलेटिक्स में भारत को गौरवान्वित किया है। उन्होंने टोक्यो पैरालंपिक में रजत पदक जीतने के बाद पेरिस पैरालंपिक 2024 में पुरुषों की ऊंची कूद टी 64 स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता। 2.08 मीटर की छलांग के साथ उन्होंने एशियाई रिकॉर्ड भी बनाया। 2026 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया। उनका जीवन उन युवाओं के लिए संदेश है जिन्हें किसी शारीरिक या सामाजिक बाधा के कारण अपने सपनों पर संदेह होता है।
गुरलीन चावला: बुंदेलखंड में खेती का नया प्रयोग - झांसी की गुरलीन चावला ने बुंदेलखंड में स्ट्रॉबेरी की खेती को लेकर ऐसा प्रयोग किया, जिसने यह धारणा चुनौती दी कि इस फसल के लिए केवल ठंडे पहाड़ी क्षेत्र ही उपयुक्त हैं। कानून की पढ़ाई कर रहीं गुरलीन ने पहले घर पर स्ट्रॉबेरी उगाने का प्रयोग किया और बाद में खेत में इसका विस्तार किया। उनके प्रयासों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सार्वजनिक रूप से सराहा। झांसी में स्ट्रॉबेरी महोत्सव के माध्यम से किसानों और युवाओं को घर, खाली स्थान और छत पर बागवानी तथा स्ट्रॉबेरी उत्पादन के प्रयोग के लिए प्रोत्साहित किया गया।
शुभावरी चौहान: युवा किसान से बाजार तक - सहारनपुर की 19 वर्षीय शुभावरी चौहान ग्रामीण युवा उद्यमिता की एक अलग तस्वीर प्रस्तुत करती हैं। 2026 के फार्म एंड फूड पुरस्कारों में उन्हें सर्वश्रेष्ठ युवा किसान के रूप में सम्मानित किया गया। वे गन्ने की खेती के साथ उससे मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार करती हैं और उनकी प्रीमियम गुड़ तथा संबंधित उत्पादों की पहुंच भारत से बाहर पेरिस, जर्मनी और दक्षिण अफ्रीका तक बताई गई है। शुभावरी जैसी युवा किसान बताती हैं कि गांव का युवा कृषि को आधुनिक व्यवसाय में बदलकर भी आगे बढ़ सकता है।
रामकुमार सिंह जादौन: सामाजिक सेवा को जीवन का हिस्सा बनाना - जालौन के रामकुमार सिंह जादौन को 2025 में उत्तर प्रदेश रत्न सम्मान से सम्मानित किया गया। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार वे कई वर्षों से सामाजिक संगठनों और संस्थानों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण, रक्तदान, बालिकाओं की शिक्षा, गौ सेवा और समाज सुधार से जुड़े कार्यक्रमों में सक्रिय रहे हैं। उनका काम दिखाता है कि सामाजिक बदलाव को स्थानीय गतिविधियों से जोड़ा जा सकता है। नियमित रक्तदान, शिक्षा के लिए जागरूकता या पर्यावरण संरक्षण जैसी पहल भी समुदाय में प्रभाव पैदा कर सकती है।
यशस्वी जायसवाल: संघर्ष से अंतरराष्ट्रीय पहचान तक - भदोही के सुरियावां से आने वाले यशस्वी जायसवाल उस युवा वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हैं जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने से पीछे नहीं हटता। कम उम्र में क्रिकेट प्रशिक्षण के लिए मुंबई पहुंचने के बाद उन्होंने कठिन परिस्थितियों का सामना किया। आज वे भारतीय क्रिकेट टीम के प्रमुख युवा खिलाड़ियों में शामिल हैं। राष्ट्रीय टीम में जगह बनाकर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व किया है। उनका सफर छोटे शहरों और गांवों के युवाओं को भरोसा देता है कि शुरुआत छोटी हो सकती है, लक्ष्य बड़ा रखा जा सकता है।
पर्यावरण से उद्यमिता तक: युवाओं का बदलता योगदान - उत्तर प्रदेश में प्रेरक युवा केवल कुछ चर्चित नामों तक सीमित नहीं हैं। मेरठ की ऐहा दीक्षित ने बहुत कम उम्र में पर्यावरण संरक्षण को अभियान बनाया। एक अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण संगठन के अनुसार, उन्होंने चार वर्ष की उम्र से पौधे लगाना शुरू किया और 2023 तक 20 हजार से अधिक पौधों की देखभाल तथा रोपण से जुड़े अभियान में भाग लिया। उनके समूह ने छोटे वन, हरित क्षेत्र और औषधीय उद्यान विकसित करने की दिशा में भी काम किया।
प्रदेश के युवाओं को संस्थागत समर्थन देने की कोशिश भी तेज हुई है। उत्तर प्रदेश सरकार की मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान योजना के तहत 21 से 40 वर्ष के युवाओं को उद्योग या सेवा आधारित परियोजनाओं के लिए पांच लाख रुपये तक का ब्याज-मुक्त और बिना गारंटी ऋण देने का प्रावधान है। योजना का लक्ष्य हर वर्ष एक लाख युवाओं को स्वरोजगार के अवसर देना और दस वर्षों में दस लाख युवाओं तक पहुंच बनाना है। 2026-27 के राज्य बजट में इस अभियान के लिए 1,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया।
स्टार्टअप और नवाचार के क्षेत्र में भी उत्तर प्रदेश की स्थिति मजबूत हुई है। स्टार्टअप इंडिया की 2026 की राज्य रैंकिंग में उत्तर प्रदेश को शीर्ष प्रदर्शन करने वाले राज्यों की श्रेणी में रखा गया। राज्य में इनोवेशन हब, उद्यमिता सहायता और उच्च शिक्षण संस्थानों में नवाचार को बढ़ावा देने वाली व्यवस्थाएं विकसित की गई हैं। जून 2026 में लखनऊ में आयोजित माय भारत राष्ट्रीय युवा स्वयंसेवक सम्मेलन में उत्तर प्रदेश के लगभग 1,500 से अधिक युवा स्वयंसेवकों ने हिस्सा लिया।
इन कहानियों की अहमियत इस बात में भी है कि इनमें सफलता का रास्ता एक जैसा नहीं है। किसी के पास खेत है, किसी के पास खेल का मैदान, किसी के पास विज्ञान का छोटा-सा मॉडल और किसी के पास समाज के लिए काम करने का संकल्प। फिर भी सभी में पहल करने, सीखते रहने और दूसरों के लिए रास्ता खोलने की समान भावना दिखाई देती है।
इन उदाहरणों को साथ रखें तो उत्तर प्रदेश के युवा की भूमिका कई स्तरों पर सामने आती है। कोई खेत में नई फसल उगाकर किसानों को नई दिशा देता है, कोई गांव की समस्या का वैज्ञानिक समाधान खोजता है, कोई खेल के मैदान में देश का झंडा ऊंचा करता है और कोई पर्यावरण या सामाजिक सेवा के जरिए समुदाय को जोड़ता है।




