विज्ञान सम्पूर्ण वैश्विक समुदाय की साझा धरोहर है - प्रो. अभय करंदीकर
वाराणसी, 14 जून।
विज्ञान भारती का 7वां राष्ट्रीय अधिवेशन रविवार को विकसित भारत के लक्ष्य के अनुरूप विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार के लिए भारत-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाने के आह्वान के साथ संपन्न हुआ। समापन सत्र में वैज्ञानिकों एवं शिक्षाविदों ने स्वदेशी नवाचार को प्रोत्साहित करने, भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक विज्ञान के साथ समन्वित करने तथा वैज्ञानिक विमर्शों को सामाजिक क्रियान्वयन से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया।
मुख्य अतिथि प्रो. अभय करंदीकर, सदस्य, नीति आयोग ने कहा कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में विश्व तेजी से परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है और तकनीकी प्रगति अब वर्षों के बजाय महीनों में दिखाई दे रही है। भारत के पास विशाल युवा शक्ति है, किंतु विकसित भारत के निर्माण के लिए वैज्ञानिक नवाचार पर विशेष ध्यान देना होगा। स्वदेशी नवाचार की अवधारणा पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि इसका अर्थ विश्व से अलग-थलग होना नहीं है, क्योंकि विज्ञान सम्पूर्ण वैश्विक समुदाय की साझा धरोहर है। भारत को अपनी प्राचीन वैज्ञानिक परंपराओं का अध्ययन आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ करते हुए अपनी चुनौतियों के अनुरूप समाधान विकसित करने चाहिए, जो विश्व के लिए भी मार्गदर्शक बन सकें। विज्ञान भारती का व्यापक जमीनी नेटवर्क इन विचार-विमर्शों को व्यवहारिक कार्यों में परिवर्तित करने, स्थानीय चुनौतियों की पहचान करने तथा राष्ट्रीय स्तर पर समाधान विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
विशिष्ट अतिथि प्रो. गोवर्धन दास, सदस्य, नीति आयोग ने भारत की सभ्यतागत विरासत और उसके भावी निर्माण के संबंध पर विचार व्यक्त किए। उन्होंने भारतीय इतिहास के साहस, नेतृत्व और धैर्य के प्रेरक प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि राष्ट्र का गौरवशाली अतीत एक सशक्त और समृद्ध भविष्य के निर्माण की प्रेरणा देता है। उन्होंने महाराणा प्रताप और महाराजा रणजीत सिंह जैसी विभूतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका जीवन आज भी देशवासियों को प्रेरित करता है। उन्होंने प्राचीन भारत की वैज्ञानिक उपलब्धियों का भी उल्लेख किया तथा ज्ञान-विज्ञान के विकास में भारत के ऐतिहासिक योगदान और वर्तमान भूमिका पर चर्चा की।
प्रो. अजित कुमार चतुर्वेदी, कुलपति, काशी हिन्दू विश्वविद्यालय ने कहा कि भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक विरासत गौरव का विषय है, किंतु नई पीढ़ी को प्रेरित करने के लिए विज्ञान, प्रौद्योगिकी, नवाचार और उद्योग के क्षेत्र में ठोस उपलब्धियां प्रस्तुत करना आवश्यक है। आने वाले कुछ वर्ष अत्यंत महत्वपूर्ण हैं और इस अवधि में शोध, तकनीकी विकास तथा नवाचार के क्षेत्र में उल्लेखनीय परिणाम सामने लाने होंगे। अतीत से प्रेरणा लेते हुए विज्ञान के माध्यम से बेहतर भविष्य का निर्माण करना वर्तमान समय की आवश्यकता है।
समापन सत्र में विज्ञान भारती के राष्ट्रीय संगठन सचिव डॉ. शिव कुमार शर्मा ने कहा कि अधिवेशन के नौ सत्रों में स्वास्थ्य, ऊर्जा और पर्यावरण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर व्यापक मंथन हुआ है। कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे आगामी दो वर्षों में इन विषयों को लेकर अपने-अपने क्षेत्रों में ठोस कार्ययोजनाओं के साथ आगे बढ़ें तथा समाज की व्यापक सहभागिता सुनिश्चित करें।
डॉ. शेखर सी. मांडे, राष्ट्रीय अध्यक्ष, विज्ञान भारती ने कहा कि अधिवेशन के दौरान हुए व्यापक विचार-विमर्श ने विज्ञान भारती की भावी दिशा को स्पष्ट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता, वन हेल्थ और नेट-ज़ीरो जैसे विषयों को वर्तमान समय की प्रमुख वैश्विक चुनौतियां बताते हुए कहा कि इन सत्रों में वैज्ञानिक एवं तकनीकी समाधानों के साथ-साथ भारतीय ज्ञान परंपरा को उनके समाधान में समाहित करने पर भी सार्थक चर्चा हुई। उन्होंने प्रतिभागियों से आग्रह किया कि वे अधिवेशन से प्राप्त विचारों और निष्कर्षों को अपने-अपने क्षेत्रों एवं संस्थानों तक पहुंचाएं तथा समकालीन चुनौतियों के समाधान हेतु भारतीय दृष्टिकोण पर आधारित व्यावहारिक कार्ययोजनाएं विकसित करें।
इस अवसर पर विज्ञान भारती द्वारा सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया गया, जिसमें विकसित भारत के लक्ष्य की प्राप्ति हेतु नई भारत-केंद्रित विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार नीति तैयार करने का आह्वान किया गया।
विज्ञान भारती की राष्ट्रीय सचिव प्रो. रंजना अग्रवाल ने संगठन का राष्ट्रीय प्रस्ताव प्रस्तुत किया। प्रस्ताव में विज्ञान, प्रौद्योगिकी, नवाचार, स्टार्टअप, अंतरिक्ष, ऊर्जा एवं रक्षा क्षेत्र में भारत की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए अनुसंधान की गुणवत्ता, उद्योग-अकादमिक सहयोग तथा वैज्ञानिक नवाचारों के सामाजिक उपयोग को और सुदृढ़ करने का सुझाव दिया गया है। साथ ही भारतीय भाषाओं में वैज्ञानिक संचार, पारंपरिक ज्ञान एवं आधुनिक विज्ञान के समन्वय तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप शोध एवं नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने का आह्वान किया गया।



