• अनुवाद करें: |
मुख्य समाचार

सामाजिक कार्यों में सफल प्रयोग समाजव्यापी होने चाहिए – अतुल लिमये जी

  • Share:

  • facebook
  • twitter
  • whatsapp

पुणे

 राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ जनकल्याण समिति द्वारा आयोजित ‘पूजनीय श्री गुरुजी पुरस्कार’ सम्मान समारोह में सह सरकार्यवाह अतुल लिमये जी ने कहा कि “समाज के हर क्षेत्र में व्यक्तिगत स्तर पर बदलाव के कई सफल प्रयोग जारी हैं। लेकिन ये प्रयोग केवल व्यक्तियों तक सीमित न रहकर समाज व्यापी होने चाहिए। ऐसा हुआ तो इन प्रयोगों के माध्यम से व्यवस्थागत परिवर्तन हो सकता है। समारोह में उद्योगपति डॉ. अभय फिरोदिया मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। कार्यक्रम में अनुसंधान क्षेत्र में पुरस्कार दादा लाड और सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में आचार्य श्री महंत भारतभूषण दासजी महाराज को प्रदान किया गया। पुरस्कार के रूप में शॉल, प्रशस्तिपत्र, सम्मान चिन्ह और एक लाख रुपये की राशि शामिल रही।

अतुल लिमये जी ने कहा, “समाज की सरकार पर निर्भरता बढ़ती जा रही है, जिससे समाज के विकलांग होने की आशंका है। इस निर्भरता को कम करने के लिए, सफल प्रयोगों का एक अनुकरणीय ढांचा विकसित करना आवश्यक है जो समाज को बदल सके और एक आदर्श प्रणाली विकसित कर सके। विकसित भारत की ओर बढ़ने के लिए यह कार्य अत्यंत महत्वपूर्ण है।”

अभय फिरोदिया ने कहा, “कई लोग हिन्दुत्व के प्रति मन में कटुता रखे हुए दिखाई देते हैं। भारत में बौद्ध, जैन, सिक्ख और वैदिकों की एकत्रित परंपरा ही हिन्दुत्व है। हिन्दू धर्म एक जीवन शैली और विचारधारा है, और इसे व्यवहार में लाने का नाम ही हिन्दुत्व है। जनकल्याण समिति समाज के सशक्तिकरण के लिए काम करने वाले लोगों को संगठित करने और उन्हें प्रेरित करने का महत्वपूर्ण कार्य कर रही है।” उन्होंने कहा, “मूल्यों की समझ ही धर्म है। जब तक आज की पीढ़ी नैतिक मूल्यों का पालन करती रहेगी, धर्म अक्षुण्ण रहेगा।”

भारतभूषण महाराज ने कहा, “सनातन परंपरा हमें जीवन जीने की कला सिखाती है। समाज को समृद्ध बनाने के लिए व्यावहारिक कार्यों के साथ-साथ आध्यात्मिक शांति के लिए प्रयास करना आवश्यक है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का मूल्यांकन बाहर से नहीं किया जा सकता, इसके लिए संघ में प्रत्यक्ष रूप से भाग लेना आवश्यक है।”

दादा लाड ने कहा कि कपास किसानों की आत्महत्याओं का कारण नहीं, बल्कि गौरव की फसल है। उन्होंने कहा, “दुर्भाग्य से विदर्भ में हुई आत्महत्याओं को कपास की फसल से जोड़ा गया। वास्तव में, कपास भारत की प्रमुख नकदी फसल है, जिसने संपूर्ण विश्व को कपड़ा दिया है। कपास की पैदावार बढ़ाने के लिए, कपास के गोले का वजन बढ़ाना आवश्यक है। मैंने कपास की फसल में डंठल को निकालकर ‘फलशाखा’ को लंबा करने की तकनीक विकसित की। इसके परिणामस्वरूप, कपास के गोले का वजन 10 ग्राम तक बढ़ गया और परिणामस्वरूप प्रति एकड़ पैदावार 4-5 क्विंटल से बढ़कर 15 क्विंटल हो गई।”

चिंचवड़ स्थित पूर्वांचल छात्रावास के छात्रों ने वंदे मातरम् प्रस्तुत किया। सेवा भारती संस्था के पश्चिम महाराष्ट्र प्रांत के सचिव प्रदीप सबनीस ने धन्यवाद ज्ञापन किया। कार्यक्रम का संचालन प्रो. डॉ. प्रांजलि देशपांडे ने किया।

एक करोड़ रुपये का दान

जनकल्याण के कार्यों को प्रोत्साहित करने और उनमें सहायता करने का महत्वपूर्ण कार्य जनकल्याण समिति कर रही है। यह समाज के उत्थान का एक बेहतरीन साधन है, इन शब्दों में डॉ. अभय फिरोदिया ने जनकल्याण समिति के कार्यों की सराहना की। उन्होंने इस अवसर पर कार्य के लिए एक करोड़ रुपये दान करने की घोषणा की।