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दिल्ली में जुटेगा जनजातीय समाज, मतांतरण और संस्कृति और पहचान पर होगा मंथन

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दिल्ली में जुटेगा जनजातीय समाज, मतांतरण और संस्कृति और पहचान पर होगा मंथन


धरती आबा बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के अवसर पर 24 मई को दिल्ली के लाल किला मैदान में विशाल जनजाति सांस्कृतिक समागम आयोजित किया जाएगा।  जनजाति सुरक्षा मंच की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में देशभर के विभिन्न राज्यों से हजारों की संख्या में जनजातीय समाज के लोगों के शामिल होने की संभावना है।  कार्यक्रम के मुख्य अतिथि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह होंगे।


कार्यक्रम में बिहार, झारखंड, ओडिशा, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश समेत कई राज्यों से जनजातीय समाज के प्रतिनिधि पहुंचेंगे, आयोजन समिति के अनुसार प्रतिभागियों को दिल्ली लाने के लिए 46 से अधिक विशेष ट्रेनों की व्यवस्था की गई है। वहीं बाहर से आने वाले लोगों के ठहरने और भोजन की व्यवस्था राजधानी के लगभग 80 विद्यालयों में की गई है।


कार्यक्रम के माध्यम से बिरसा मुंडा के जीवन, उनके उलगुलान आंदोलन और जनजातीय अस्मिता की रक्षा के लिए किए गए संघर्ष को प्रमुखता से प्रस्तुत किया जाएगा,  साथ ही जनजातीय संस्कृति, परंपरा और धार्मिक पहचान से जुड़े विषयों पर भी चर्चा होगी। आयोजन में मतांतरण के मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाए जाने की तैयारी है।  बिरसा मुंडा द्वारा ईसाई मिशनरियों के खिलाफ चलाए गए आंदोलन और बिरसाइत धर्म की झलक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से दिखाई जाएगी।


जनजाति सुरक्षा मंच के राष्ट्रीय सह-संयोजक राजकिशोर हांसदा ने बताया कि कार्यक्रम शुरू होने से पहले दिल्ली के पांच अलग-अलग स्थानों से भव्य शोभायात्राएं निकाली जाएंगी। राजघाट चौक, रामलीला मैदान, अजमेरी गेट चौक, कुदशिला बाग और श्यामगिरि मंदिर से निकलने वाली इन यात्राओं में जनजातीय समाज के लोग पारंपरिक वेशभूषा और पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ शामिल होंगे।


कार्यक्रम की अध्यक्षता मंच के राष्ट्रीय संयोजक गणेशराम भगत करेंगे। झारखंड क्षेत्र संयोजक संदीप उरांव के अनुसार राज्य से करीब 4500 लोगों ने समागम में शामिल होने के लिए पंजीकरण कराया है और आयोजकों का कहना है कि यह आयोजन जनजातीय समाज की सांस्कृतिक चेतना और सामाजिक एकता को मजबूत करने का प्रयास होगा।