हरिद्वार, उत्तराखण्ड
उत्तराखण्ड की धर्मनगरी हरिद्वार के सुल्तानपुर नगर पंचायत में बिना अनुमति बनाई जा रही मस्जिद की ऊँची मीनार आखिरकार प्रशासनिक सख्ती के बाद हटाई जाने लगी है। लंबे समय तक नियमों की अनदेखी के बाद अब हालात ऐसे बने कि प्रबंधन को खुद ही निर्माण हटाने पर मजबूर होना पड़ा।
लगभग दस महीने पहले इस निर्माण को लेकर सवाल उठे थे। आरोप था कि मस्जिद निर्माण बिना प्रशासनिक अनुमति और बिना नक्शा पास कराए किया जा रहा है। उस समय नोटिस जारी हुआ, निर्माण भी रोका गया, लेकिन कथित तौर पर नियमों की अनदेखी जारी रही।
हाल ही में फिर से निर्माण गतिविधियां सामने आने पर प्रशासन हरकत में आया। एसडीएम के नेतृत्व में टीम मौके पर पहुंची और साफ चेतावनी दी गई कि यदि अवैध निर्माण नहीं हटाया गया तो पूरे परिसर को सील कर दिया जाएगा। इसके बाद मस्जिद प्रबंधन ने खुद मीनार हटाने का काम शुरू करा दिया।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है, कि क्या हमारे यहां नियमों का पालन केवल कार्रवाई के डर से ही होता है?
जब तक प्रशासन सख्ती न दिखाए, तब तक अवैध निर्माण जारी रहता है, लेकिन जैसे ही सीलिंग और कानूनी कार्रवाई का खतरा सामने आता है, अचानक “सुधार” शुरू हो जाता है।

क्या थे निर्माण में नियमों के उल्लंघन?
जानकारी के अनुसार मस्जिद निर्माण में कई जरूरी मानकों की अनदेखी की गई थी।
- निर्माण का नक्शा पास नहीं कराया गया
- फायर सेफ्टी विभाग से एनओसी नहीं ली गई
- लोक निर्माण विभाग की अनुमति नहीं ली गई
- पार्किंग और ऊँचाई संबंधी मानकों की अनदेखी हुई
बताया जा रहा है कि मीनार की ऊँचाई सामान्य स्वीकृत मानकों से कहीं अधिक थी।
विशेषज्ञों की मानें तो पहाड़ी और रिहायशी क्षेत्रों में 12 मीटर तक की ऊँचाई की अनुमति होती है, जबकि मैदानी इलाकों में करीब 30 मीटर (100 फीट) तक निर्माण मान्य माना जाता है। बताया जा रहा है कि यहाँ बनाई जा रही मीनार लगभग 250 फीट ऊँची थी, जो निर्धारित मानकों से कहीं अधिक बताई जा रही है।
सूत्रों के अनुसार, 100 मीटर से ऊँची किसी भी इमारत के लिए शासन स्तर की अनुमति और तकनीकी संस्थानों से संरचनात्मक सुरक्षा प्रमाणन जरूरी होता है।
हरिद्वार के जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने बताया कि मस्जिद प्रबंधन को पहले भी नोटिस दिया गया था। सोशल मीडिया में मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने दोबारा जांच की और फिर कार्रवाई की चेतावनी दी गई।
प्रशासन सुप्रीम कोर्ट के 2009 और 2016 के निर्देशों का हवाला दे रहा है, जिनमें किसी भी धार्मिक निर्माण से पहले प्रशासनिक अनुमति को अनिवार्य बताया गया है।
उत्तराखण्ड में कितनी मस्जिदें?
सरकारी आंकड़ों के अनुसार उत्तराखण्ड में 722 से अधिक मस्जिदें दर्ज हैं। इनमें सबसे अधिक हरिद्वार जिले में बताई जाती हैं।
हरिद्वार — 322
देहरादून — 155
उधम सिंह नगर — 144
नैनीताल — 48
हाल के वर्षों में वक्फ संपत्तियों के रिकॉर्ड और पंजीकरण को लेकर भी कई प्रशासनिक और कानूनी सवाल उठते रहे हैं।
फिलहाल मीनार हटाने का काम प्रशासन की निगरानी में जारी है, लेकिन यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि नियमों की अनदेखी कितनी आसानी से होती है और सुधार अक्सर तब शुरू होता है जब कार्रवाई सिर पर आ खड़ी होती है।



