गोष्ठी का शुभारम्भ वन्दे मातरम के साथ हुआ। सरकार्यवाह जी ने कहा कि संघ सामान्य व्यक्ति के व्यक्तिगत चरित्र एवं राष्ट्रीय चरित्र दोनों को ठीक करने की दृष्टि से कार्य कर रहा है। समाज की उन्नति के लिए समाज का संगठन करना, सामूहिक प्रयास करना, सबको साथ लेकर चलना, यह भी अति आवश्यक है। देश के सर्वांगीण विकास में सभी का योगदान होना चाहिए। संघ सभी प्रकार के भेदभाव को समाप्त कर समाज के लिए कार्य करता है। संघ केवल एक संगठन नहीं, बल्कि राष्ट्रीय आंदोलन है और संघ कार्यकर्ताओं के लिए एक जीवन शैली है। वर्तमान में अपना भारत देश दुनिया में अग्रणी देशों में से एक है। संघ कार्य का लक्ष्य भारत को समरस, समर्थ एवं समर्थ बनाना है। भारत दुनिया को जीवन जीने की शैली बता रहा है। अन्य देश भारत का अनुसरण कर रहे हैं।
मुख्य समाचार
संघ का कार्य समाज को समरस, समर्थ एवं सशक्त बनाने के लिए चल रहा है – दत्तात्रेय होसबाले जी
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धर्मशाला
कार्यक्रम में प्रमुख जनों ने सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक, सेवा कार्य एवं देश दुनिया की वर्तमान परिस्थिति, शिक्षा नीति, संस्कार, संघ में महिलाओं की सहभागिता को लेकर प्रश्न रखे, जिनका सरकार्यवाह जी ने उत्तर दिया। सरकार्यवाह जी ने कहा कि आज देश में एक लाख से अधिक सेवा कार्य चल रहे हैं। एक लाख से अधिक स्थानों पर शाखा, मिलन, संघ मंडली चल रही हैं। संघ के स्वयंसेवक समाज जीवन में अनेक क्षेत्रों, गतिविधियों में समाज के साथ मिलकर कार्य कर रहे हैं। गोष्ठी में सेवानिवृत सेना अधिकारी, प्रशासनिक अधिकारी, महाविद्यालय एवं विश्वविद्यालय के आचार्य, व्यापार मंडल के अध्यक्ष, प्रसिद्ध गायक, खिलाड़ी, समाचार पत्रों के मुख्य संपादक, जन प्रतिनिधि, अनेक संस्थाओं के पदाधिकारी एवं साधु-संतों ने भाग लिया। इस अवसर पर मंच पर प्रान्त संघचालक डॉ. वीर सिंह रांगड़ा, सह प्रान्त संघचालक अशोक शर्मा जी, विभाग संघचालक भूषण रैना जी, जिला संघचालक प्रदीप कुमार जी उपस्थित रहे।



