उत्तराखण्ड में लागू समान नागरिक संहिता (UCC) अब केवल एक कानून नहीं, बल्कि मुस्लिम महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और अधिकारों की नई ताकत बनता दिख रहा है। पहली बार देश में हलाला जैसी कुप्रथा के विरुद्ध UCC के तहत मुकदमा दर्ज हुआ है। यह मामला हरिद्वार जिले के रुड़की क्षेत्र से सामने आया है, जहाँ एक मुस्लिम महिला ने अपने शौहर और ससुराल पक्ष पर हलाला के लिए दबाव बनाने का आरोप लगाया है।
यह मात्र एक FIR नहीं, बल्कि उन महिलाओं की आवाज है जो वर्षों से तीन तलाक, हलाला और दहेज उत्पीड़न जैसी समस्याओं से जूझती रही हैं। उत्तराखण्ड में UCC लागू होने के बाद यह पहला मामला है जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।

शादी, प्रताड़ना और फिर तीन तलाक
बताया जा रहा है बुग्गावाला थाना क्षेत्र की रहने वाली पीड़िता का निकाह लगभग दो साल पहले मोहम्मद दानिश से हुआ था। महिला का आरोप है कि निकाह के कुछ समय बाद से ही दहेज को लेकर उसे प्रताड़ित किया जाने लगा।
उसने पुलिस को बताया कि कई बार उसके साथ मारपीट हुई, कमरे में बंद कर पीटा गया और आखिर में शौहर ने तीन तलाक देकर घर से निकाल दिया।
घर बचाने के लिए हलाला का दबाव
लगभग 15 दिन मायके में रहने के बाद महिला ने दोबारा घर बसाने की कोशिश की, लेकिन यहीं से मामला और गंभीर हो गया। आरोप है कि शौहर और ससुराल पक्ष ने उसे दोबारा साथ रखने के लिए हलाला करने का दबाव बनाया।
महिला के अनुसार उससे कहा गया कि “जहां कहा जाए, वहां हलाला करना पड़ेगा।”
UCC के तहत दर्ज हुआ देश का पहला केस
महिला की शिकायत पर बुग्गावाला थाने में शौहर मोहम्मद दानिश समेत परिवार के 9 लोगों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया गया।
इस मामले में केवल तीन तलाक या दहेज उत्पीड़न ही नहीं, बल्कि उत्तराखण्ड UCC एक्ट की धाराएं भी लगाई गईं। पुलिस ने UCC की धारा 32(1)(ii) और 32(1)(iii) के तहत कार्रवाई की, जिनमें हलाला जैसी कुप्रथाओं को अपराध माना गया है।
इसके अलावा भारतीय न्याय संहिता (BNS), मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण अधिनियम 2019 और दहेज प्रतिषेध अधिनियम की धाराएं भी जोड़ी गईं।
जाँच के बाद कोर्ट में चार्जशीट
पुलिस जाँच में आरोपों की पुष्टि होने के बाद मामले को गंभीर अपराध मानते हुए चार्जशीट तैयार की गई। SI मनोज कुमार ने जांच पूरी कर न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वितीय रुड़की की अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया।
इस केस में शौहर, ससुर, जेठ, देवर, सास, ननद और ननदोई समेत कुल 9 लोगों को आरोपी बनाया गया है।
क्यों विशेष माना जा रहा यह मामला?
देश में पहली बार हलाला को लेकर किसी महिला ने UCC के तहत कानूनी लड़ाई शुरू की है। इसे मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों और सुरक्षा की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
उत्तराखण्ड सरकार पहले ही दावा कर चुकी है कि UCC महिलाओं को समान अधिकार, सम्मान और कानूनी सुरक्षा देने के उद्देश्य से लागू किया गया है। अब यह मामला उस दावे की पहली बड़ी कानूनी परीक्षा बन गया है।
कानूनी विशेषज्ञ मानते हैं कि यह केस आने वाले समय में मिसाल बन सकता है और महिलाओं को कुप्रथाओं के विरुद्ध खुलकर आवाज उठाने का साहस देगा।
उत्तराखण्ड में दिख रहा UCC का असर
राज्य सरकार के अनुसार UCC लागू होने के बाद विवाह पंजीकरण में तेजी आई है। पहले जहाँ प्रतिदिन औसतन 67 विवाह पंजीकरण होते थे, वहीं अब यह आंकड़ा लगभग 1400 प्रतिदिन तक पहुँच गया है।
हलाला के विरुद्ध दर्ज यह पहला मामला अब केवल उत्तराखण्ड ही नहीं, बल्कि पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया है। यह मामला साफ संकेत देता है कि कानून अब महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान के मुद्दों पर पहले से अधिक कठोर नजर आ रहा है।



