नई दिल्ली।
विश्व हिन्दू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष व वरिष्ठ अधिवक्ता आलोक कुमार ने तमिलनाडु विधानसभा में उदयनिधि स्टालिन के सनातन विरोधी वक्तव्य की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि क्या इस प्रकार का वक्तव्य किसी अन्य मज़हब के विरुद्ध भी देने का साहस कर सकते हैं? सनातन हिन्दू धर्म और उसकी आस्थाओं को निरंतर अपमानित करना लोकतांत्रिक और संवैधानिक मूल्यों के भी विपरीत है। नेता विपक्ष के बयान को अविलंब विधानसभा की कार्यवाही से निकाला जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि अत्यंत विडंबनापूर्ण स्थिति है कि जिन परिवारों और राजनीतिक दलों को स्वयं सनातन परंपराओं, मंदिरों और हिन्दू समाज से प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष लाभ प्राप्त होता है, वही लोग सनातन को समाप्त करने की बातें कर रहे हैं। तमिलनाडु सरकार को राज्य के प्रसिद्ध मंदिरों और सनातन परंपरा से जुड़े धार्मिक स्थलों से पर्याप्त राजस्व प्राप्त होता है, इसके बावजूद सनातन विरोधी मानसिकता का प्रदर्शन करना उसी थाली में छेद करने जैसा है।
आलोक कुमार ने कहा कि तमिलनाडु के नवीन मुख्यमंत्री को भी इस विषय पर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए कि उनकी सरकार सनातन परंपरा और हिन्दू आस्थाओं के सम्मान के पक्ष में है अथवा वह ऐसे विभाजनकारी और दुर्भावनापूर्ण हिन्दूद्रोही वक्तव्यों का समर्थन करती है।
उन्होंने मांग की कि इस प्रकार के घोर आपत्तिजनक और विभाजनकारी वक्तव्य को विधानसभा की कार्यवाही से तत्काल हटाया जाए तथा भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने हेतु आवश्यक कदम उठाए जाएँ।
विहिप अध्यक्ष ने कहा कि सनातन हिन्दू धर्म तमिलनाडु सहित पूरे भारत की सांस्कृतिक आत्मा है। इतिहास साक्षी है कि सनातन को समाप्त करने का प्रयास करने वाली अनेक विचारधाराएँ स्वयं समाप्त हो गईं, किंतु सनातन आज भी उतनी ही शक्ति, श्रद्धा और व्यापकता के साथ समाज का मार्गदर्शन कर रहा है और आगे भी करता रहेगा।



