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सौर ऊर्जा में उत्तराखण्ड ने स्थापित किया नया कीर्तिमान

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देहरादून, उत्तराखण्ड

 उत्तराखण्ड अब हरित ऊर्जा के क्षेत्र में नई पहचान बना रहा है। जी हांराज्य ने सौर ऊर्जा उत्पादन क्षमता में एक गीगावाट यानी 1000 मेगावाट का आंकड़ा पार कर लिया है। अब उत्तराखंड की कुल सौर क्षमता 1027.87 मेगावाट हो गई है। यह राज्य के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। लगातार बढ़ते सौर उत्पादन के कारण उत्तराखण्ड हरित ऊर्जा का नया केंद्र बनता जा रहा है। सरकार ने वर्ष 2027 तक इस क्षमता को बढ़ाकर 2.5 गीगावाट (2500 मेगावाट) करने का लक्ष्य रखा है।

बता दें, अब तक उत्तराखण्ड की पहचान मुख्य रूप से जलविद्युत परियोजनाओं से होती थी, लेकिन सौर ऊर्जा में एक गीगावाट से अधिक स्थापित क्षमता प्राप्त कर राज्य ने ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में मजबूत कदम बढ़ाया है। इस सफलता के पीछे कई योजनाओं का लगातार और प्रभावी क्रियान्वयन है।

इस उपलब्धि में उत्तराखण्ड अक्षय ऊर्जा विकास एजेंसी (उरेडा) की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। एजेंसी ने दूरस्थ और पर्वतीय क्षेत्रों तक सौर ऊर्जा पहुंचाने का काम किया, जिससे गांव-गांव तक इसका लाभ मिला। सरकार ने सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए अनुकूल नीतियां बनाईं, सब्सिडी की व्यवस्था की, अनुमोदन प्रक्रिया को सरल किया और निजी निवेश को प्रोत्साहित किया।

वही मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना के तहत 100 मेगावाट से अधिक क्षमता के संयंत्र लगाए जा रहे हैं। इसके अलावा 30 मेगावाट के कैप्टिव सोलर पावर प्लांट और सरकारी भवनों पर 13.5 मेगावाट क्षमता के सौर संयंत्र स्थापित किए जा रहे हैं। इन योजनाओं से न केवल कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।