• अनुवाद करें: |
मुख्य समाचार

कृष्ण भक्ति के रंग में रंगा वृंदावन, विदेशी श्रद्धालुओं ने भी खेली ब्रज की होली

  • Share:

  • facebook
  • twitter
  • whatsapp

वृंदावन 

जब रंग, भक्ति और संस्कृति एक साथ मिलते हैं, तब ब्रज की होली केवल त्योहार नहीं रहती, बल्कि एक आध्यात्मिक अनुभव बन जाती है। रंगभरनी एकादशी के दिन वृंदावन में ऐसा ही दृश्य देखने को मिला, जहां देश ही नहीं बल्कि दुनिया के कोने-कोने से आए श्रद्धालु कृष्ण भक्ति में रंगे नजर आए। वृंदावन की पावन गलियों में श्रद्धा, रंग और उल्लास का अद्भुत संगम देखने को मिला। ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर की नगरी में भारत के साथ-साथ स्पेन, सेंट्रल अमेरिका, रूस, कनाडा सहित कई देशों से आए श्रद्धालु एक ही रंग में रंगे नजर आए। मंदिरों में दर्शन, परिक्रमा मार्ग पर भजन-कीर्तन और रंगों की बौछार के बीच विदेशी भक्त भी पूरी तरह ब्रज संस्कृति में रच-बस गए। राधे-राधेके जयघोष और ढोल की थाप पर वे स्थानीय श्रद्धालुओं के साथ नाचते-गाते आगे बढ़ते दिखे। भाषा और देश अलग-अलग थे, लेकिन सभी का भाव एक ही था कृष्ण भक्ति। टेसू के फूलों से बने प्राकृतिक रंग और अरारोट के गुलाल से खेली जाने वाली यह पारंपरिक होली विदेशी श्रद्धालुओं के लिए एक गहरा आध्यात्मिक अनुभव बन रही है। सांस्कृतिक दृष्टि से वृंदावन की होली अब भारत की पहचान को दुनिया तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम बनती जा रही है।