पराक्रम, त्याग और ज्ञान के समन्वय से ही युवा शक्ति निर्भय बन सकती है...
भारतीय शिक्षण मण्डल
अखिल भारतीय संगठन मंत्री बी. आर. शंकरानन्द जी ने कहा कि भारत तीन प्रमुख गुणों –
पराक्रम, त्याग और ज्ञान, के लिए जाना जाता
है। यही तीनों गुण भारतीय जीवन-दृष्टि और राष्ट्र की वास्तविक शक्ति के आधार हैं।
भारत को “मृत्युंजय भारत” बताते हुए कहा कि भारतीय समाज मृत्यु से भयभीत होने वाला
नहीं है। आवश्यकता पड़ने पर वह साहसपूर्वक चुनौतियों का सामना करता है। इसलिए जीवन
में निर्भयता का होना आवश्यक है।
उन्होंने स्पष्ट
किया कि निर्भयता का अर्थ घमंड या आक्रामकता नहीं, बल्कि मन की गहरी शांति है। यह आंतरिक
शांति तभी प्राप्त होती है, जब व्यक्ति अपने मन को एकाग्र और संयमित करना सीखता है। एकाग्र मन
ही सही निर्णय लेने और कठिन परिस्थितियों में धैर्य बनाए रखने की शक्ति देता है।



