ऑपरेशन सिंदूर ने स्वदेशी रक्षा क्षमताओं की अनिवार्यता साबित की : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु
आज के वैश्विक परिदृश्य में आत्मनिर्भरता केवल विकास का लक्ष्य नहीं, बल्कि प्रत्येक राष्ट्र की रणनीतिक आवश्यकता बन चुकी है। राष्ट्रपति ने गुरुवार को राष्ट्रपति भवन में मिलिट्री इंजीनियर सर्विसेज (एमईएस) के वर्ष 2023 और 2024 बैच के अधिकारी प्रशिक्षुओं को संबोधित करते हुऐ कहा कि आत्मनिर्भर देश आर्थिक स्थिरता बनाए रखने, संकट की परिस्थितियों का प्रभावी ढंग से सामना करने तथा विकासात्मक प्राथमिकताओं को सुरक्षित रखने में अधिक सक्षम होता है।
राष्ट्रपति ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने स्पष्ट रूप से सिद्ध किया है कि स्वदेशी रक्षा क्षमताएं, उन्नत तकनीक और मजबूत घरेलू औद्योगिक आधार किसी भी राष्ट्र की परिचालन तत्परता तथा रणनीतिक प्रभावशीलता के लिए अनिवार्य हैं, उन्होंने बताया कि 7 से 10 मई, 2025 के दौरान भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा संचालित इस अभियान ने पाकिस्तान तथा पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया था। इस अभियान ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत की बढ़ती क्षमता को भी रेखांकित किया।
राष्ट्रपति ने पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास पर भी विशेष बल दिया उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय चुनौतियों के दौर में ग्रीन टेक्नोलॉजी अपनाना, ऊर्जा एवं जल संरक्षण, हरित क्षेत्र बढ़ाना और कचरा कम करना समय की आवश्यकता है, उन्होंने प्रशिक्षु अधिकारियों से अपने कार्यों में पर्यावरणीय जिम्मेदारी को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का आह्वान किया।
राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि मिलिट्री इंजीनियर सर्विसेज देश के रक्षा ढांचे की रीढ़ है, यह संगठन रणनीतिक महत्व के सैन्य प्रतिष्ठानों के निर्माण और रखरखाव के माध्यम से सशस्त्र बलों की परिचालन क्षमता को मजबूत बनाता है।
राष्ट्रपति ने रक्षा क्षेत्र में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी की भी सराहना करते हुए कहा कि उनकी नेतृत्व क्षमता, साहस, पेशेवर दक्षता और समर्पण ने राष्ट्रीय संस्थानों तथा देश की सुरक्षा को नई मजबूती प्रदान की है, उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भविष्य में एम ई एस में भी बड़ी संख्या में महिला अधिकारी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाती दिखाई देंगी।



