लखनऊ, उत्तर प्रदेश
रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना: बेटियों को मिलेगा आत्मनिर्भरता का नया साथी, जल्द बांटी जाएंगी 50 हजार नि:शुल्क स्कूटियां
प्रदेश की बेटियों के सपनों को नई उड़ान देने के लिए उत्तर प्रदेश
सरकार जल्द ही रानी लक्ष्मीबाई स्कूटी योजना की शुरुआत करने जा रही है। इस योजना
के तहत शैक्षणिक सत्र 2025-26 में स्नातक उत्तीर्ण करने वाली टॉप 5
प्रतिशत छात्राओं को नि:शुल्क स्कूटी प्रदान की जाएगी। सरकार का उद्देश्य
प्रतिभाशाली छात्राओं को सम्मानित करने के साथ-साथ उनकी उच्च शिक्षा और आने-जाने
की सुविधा को आसान बनाना है।
जानकारी के अनुसार, सरकार ने योजना के संचालन की नीति को मंजूरी दे
दी है। इसके तहत करीब 50 हजार छात्राओं को नि:शुल्क स्कूटी दी
जाएगी। योजना का लाभ उन छात्राओं को मिलेगा, जिनके परिवार की
वार्षिक आय 12 लाख रुपये तक है। स्कूटी का वितरण प्रत्येक जिले में आयोजित विशेष
समारोह के दौरान किया जाएगा।
वही योजना की पूरी प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन होगी। इसके लिए अलग
पोर्टल तैयार किया जाएगा, जिस पर विश्वविद्यालय और महाविद्यालय
पात्र छात्राओं का विवरण अपलोड करेंगे। राज्य विश्वविद्यालयों, निजी
विश्वविद्यालयों तथा उनसे संबद्ध राजकीय, सहायता प्राप्त
और स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों की छात्राएं इस योजना के लिए पात्र होंगी। जिन
पाठ्यक्रमों में सीजीपीए प्रणाली लागू है, वहां
विश्वविद्यालय अपने निर्धारित नियमों के अनुसार सीजीपीए को प्रतिशत में बदलकर
मेरिट सूची तैयार करेंगे।
विश्वविद्यालय पात्र छात्राओं की सूची कुलसचिव और परीक्षा नियंत्रक
के संयुक्त ई-हस्ताक्षर के साथ प्रमाणित कर पोर्टल शुरू होने के एक सप्ताह के भीतर
संबंधित जिलाधिकारी और उच्च शिक्षा निदेशक को भेजेंगे। सत्यापन के बाद जिलाधिकारी
चयनित वेंडर के माध्यम से स्कूटी आवंटित करेंगे। वितरण के बाद छात्रा से स्कूटी
प्राप्ति का प्रमाण लेकर उसे भी पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा।
योजना के तहत मिलने वाली स्कूटी को लाभार्थी किसी भी स्थिति में बेच
नहीं सकेंगी। साथ ही स्कूटी पर सरकार की निर्धारित ब्रांडिंग अनिवार्य होगी।
छात्राओं को बेहतर सुविधा देने के लिए चयनित वेंडर को प्रदेश के
प्रत्येक जिले में सर्विस सेंटर स्थापित करना होगा। शिकायतों के त्वरित समाधान के
लिए अलग ऑनलाइन पोर्टल भी बनाया जाएगा, जहां छात्राएं
अपनी शिकायत दर्ज करा सकेंगी। वहीं जिलाधिकारी और उच्च शिक्षा निदेशक डैशबोर्ड के
माध्यम से पूरी व्यवस्था की निगरानी करेंगे।
हालांकि जरूरत पड़ने पर योजना के दिशा-निर्देशों में संशोधन या बदलाव
करने का अधिकार मुख्यमंत्री के पास रहेगा। यह योजना मेधावी छात्राओं के सम्मान, आत्मनिर्भरता
और उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा
रही है।



