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आगरा में DEI की अनोखी खोज, प्लास्टिक से बनेगी शीट्स

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आगरा, उत्तर प्रदेश

आगरा में दयालबाग शिक्षण संस्थान के वैज्ञानिकों ने एक सराहनीय पहल की है। उन्होंने एक ऐसी आसान और कम खर्च वाली तकनीक तैयार की है, जिससे पुराने प्लास्टिक बैग बेकार नहीं रहेंगे, बल्कि उनसे उपयोगी चीजें बनाई जा सकेंगी। यह तकनीक पर्यावरण को साफ रखने के साथ-साथ लोगों को रोजगार का अवसर भी दे रही है, जी हां, दयालबाग शिक्षण संस्थान के फुटवियर टेक्नोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डीके चतुर्वेदी और उनकी टीम ने पुराने प्लास्टिक बैगों को मजबूत और लचीली शीट में बदलने की नई विधि विकसित की है। इस शोध की शुरुआत वर्ष 2020-21 में हुई थी। वर्ष 2024 में शोध पूरा हुआ और 2025 में इस तकनीक को पेटेंट भी मिल गया।

कहां होगा उपयोग

बता दें इन प्लास्टिक शीट्स से जूतों के इनसोल, बिजली के तारों की इंसुलेशन टेप, मोटे पैड और अन्य इलेक्ट्रिकल सामान बनाए जा रहे हैं। ये शीट्स मजबूत, टिकाऊ और सुरक्षित हैं।

घर पर भी बन सकती है शीट

इस तकनीक के लिए महंगी मशीनों की जरूरत नहीं है। आम लोग घर में प्रयोग होने वाली कपड़ों की साधारण इस्त्री से भी सही तापमान पर दबाव देकर ये शीट्स बना सकते हैं। DEI ने इसके लिए एक विशेष मशीन भी तैयार की है, लेकिन घरेलू स्तर पर इस्त्री से भी काम किया जा सकता है।

कैसे बनती है प्लास्टिक शीट

-सबसे पहले पुराने हाई और लो डेंसिटी प्लास्टिक बैग इकट्ठा किए जाते हैं।

-इन्हें गुनगुने पानी और कीटाणुनाशक से धोकर अच्छी तरह सुखाया जाता है।

-फिर बैग के नीचे का हिस्सा और हैंडल काटकर आयताकार टुकड़े बनाए जाते हैं।

-इन टुकड़ों को कागज की चादरों के बीच रखकर लगभग 200 से 204 डिग्री सेल्सियस तापमान पर गर्मी और दबाव दिया जाता है।

-तय तापमान और नमी में मजबूत और लचीली शीट तैयार हो जाती है।

पर्यावरण और रोजगार दोनों को लाभ

इस तकनीक से गलियों, नदियों और खेतों में फैला प्लास्टिक कचरा कम होगा। माइक्रो-प्लास्टिक का खतरा घटेगा और पशु प्लास्टिक खाने से मरने से बचेंगे। नदियां साफ रहेंगी और उद्योगों को सस्ता कच्चा माल मिलेगा। साथ ही गांव और शहरों में छोटे स्तर पर रीसाइक्लिंग यूनिट लगाई जा सकती हैं। युवा घर पर ही प्लास्टिक शीट बनाकर जूते, टेप और अन्य सामान तैयार कर अच्छी कमाई कर सकते हैं..कुल मिलाकर, यह तकनीक न केवल प्लास्टिक कचरे की समस्या का समाधान है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ सामाजिक और आर्थिक विकास की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है।