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भूकृपा फार्म: स्वाद, स्वरोजगार और संस्कार

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देहरादून, उत्तराखण्ड

-यही है असली Vocal For Local

-यह अचार नहीं, दादी का आशीर्वाद है

 देहरादून में इन युवाओं ने कमाल कर दिखाया है। युवाओं ने अपनी दादी के कौशल और उनके नाम को ब्रांड बनाकर कुछ ऐसा काम शुरू किया कि पहाड़ ही नहीं, देश के कई हिस्सों में पहचान मिल रही है। सूरज, अमित और उनकी 4 महिला साथियों ने पढ़ाई के दौरान ही तय कर लिया, अपनी जड़ों से जुड़कर कुछ अलग करना है। बीटेक और बीएससी एग्रीकल्चर पढ़ रहे इन युवाओं ने अपने स्टार्टअप की नींव रखीं, और दादी के सम्मान में फर्म का नाम रखा- ‘भूकृपा फार्म’। भूकृपा फार्म की शुरुआत एक छोटे से कमरे में मशरूम की खेती के साथ हुई। लेकिन सिर्फ कच्चा माल बेचने की जगह इन युवाओं ने चुना वैल्यू एडिशन का रास्ता.. और फिर दादी के दिए कौशल का करिश्मा। मशरूम से बनाया स्वादिष्ट और स्वास्थ्यवर्धक अचार। बाजार में आते ही मशरूम के अचार को जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला। ये युवा यहीं नहीं रुके। अब भूकृपा फार्म बना रहा है -पहाड़ी लहसुन, लिंगड़ा, तिमला जैसे पारंपरिक पहाड़ी उत्पादों के अचार। भूकृपा फार्म सिर्फ बिजनेस नहीं, उन लोगों के लिए आमदनी का माध्यम बन चुका है। जो दुर्गम इलाकों में रहते हैं।

भूकृपा फार्म के ये युवा दुर्गम इलाकों में जाकर स्थानीय महिलाओं को देते हैं मशरूम उत्पादन की ट्रेनिंग। ऑर्गनिक खेती से उगी सब्जियां और पूरी तरह शुद्ध देसी मसालों से तैयार इन अचारों की सुगंध जहाँ भी पहुंचती है। लोग खिंचे चले जाते हैं। यही कारण है कि दिल्ली–NCR की प्रदर्शनियों में भी भूकृपा फार्म के स्टॉल पर लोग हाथों-हाथ ले रहे हैं शुद्ध पहाड़ी स्वाद। एक कमरे से शुरू हुआ सफर आज बन चुका है -युवा स्वरोजगार , पहाड़ी संस्कृति और आत्मनिर्भर भारत की मिसाल।