देहरादून, उत्तराखण्ड
सरकार ने उत्तराखण्ड के शिक्षण संस्थानों में पढ़ रहे दिव्यांग छात्र-छात्राओं को घर बैठे सिविल सेवा की निश्शुल्क तैयारी कराने का निर्णय लिया है। इस योजना के लिए समाज कल्याण विभाग को नोडल एजेंसी बनाया गया है, जो पूरे प्रशिक्षण कार्यक्रम की निगरानी करेगा। जी हां, इस योजना के माध्यम से तीन प्रकार के दिव्यांग विद्यार्थियों को शामिल किया जाएगा। इनमें चलने-फिरने में सक्षम, मूकबधिर और श्रवणबाधित छात्र-छात्राएं शामिल हैं। प्रशिक्षण पूरी तरह उनकी जरूरतों और सुविधाओं को ध्यान में रखकर तैयार किया जाएगा।
दिव्यांगों की सहूलियत के अनुसार पाठ्यक्रम को विशेष रूप से डिजाइन किया जाएगा। समाज कल्याण विभाग और राष्ट्रीय दृष्टि दिव्यांगजन सशक्तीकरण संस्थान (NIEPVD) के बीच इस प्रशिक्षण को लेकर अनुबंध भी हो चुका है। NIEPVD की ओर से प्रशिक्षण पर होने वाले खर्च के लिए 19.75 लाख रुपये का प्रस्ताव समाज कल्याण विभाग को भेजा गया है। अब इस प्रस्ताव को वित्तीय स्वीकृति के लिए शासन के पास भेजा गया है।
छह माह का मिलेगा
निश्शुल्क प्रशिक्षण
इस योजना के तहत
दिव्यांग छात्र-छात्राओं को छह महीने तक घर बैठे निश्शुल्क प्रशिक्षण दिया जाएगा।
पढ़ाई के लिए किताबें, ब्रेल लिपि और साइन लैंग्वेज जैसे माध्यमों का
उपयोग किया जाएगा। हर छात्र-छात्रा की अलग पहचान के लिए आईडी बनाई जाएगी और
प्रशिक्षण के लिए अनुभवी और कुशल शिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी। यह पहल दिव्यांग
युवाओं को बराबरी का अवसर देने और उनके सपनों को नई उड़ान देने की दिशा में एक
सराहनीय कदम मानी जा रही है।



