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क्रोशिया से आत्मनिर्भर बन रहीं महिला बन्दी

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मुरादाबाद, उत्तर प्रदेश

जेल की चारदीवारी के बीच जीवन का एक नया अध्याय लिख रही हैं मुरादाबाद जिला कारागार की महिला बंदी। जी हां, यहां करीब 20 महिलाएं क्रोशिया का हुनर सीखकर भगवान के वस्त्र, लड्डू गोपाल की पोशाक, माता रानी के कपड़े, चुनरी और सुंदर मालाएं तैयार कर रही हैं।

इसके साथ ही महिलाएं मोबाइल कवर, चश्मे के कवर और नजरबट्टू जैसी कई उपयोगी चीजें भी बना रही हैं। अलग-अलग रंग और डिजाइन में तैयार इन उत्पादों को लोगों की पसंद मिल रही है।

हुनर से आत्मनिर्भर बनने का प्रयास

जेल प्रशासन की इस पहल का उद्देश्य महिला बंदियों को ऐसा हुनर सिखाना है, जिससे वे जेल से बाहर आने के बाद अपने पैरों पर खड़ी हो सकें। महिलाओं को क्रोशिया का प्रशिक्षण दिया जा रहा है और उनके बनाए सामान की बिक्री भी की जा रही है। इससे उन्हें आमदनी के साथ-साथ अपने हुनर को निखारने और आत्मविश्वास बढ़ाने का मौका मिल रहा है। महिलाओं को प्रशिक्षण देने वाली पूजा राणा के अनुसार, करीब 20 महिलाएं उनके साथ मिलकर अलग-अलग तरह के क्रोशिया उत्पाद तैयार कर रही हैं। उन्हें यह भी सिखाया जा रहा है कि अपने हुनर से किस तरह कमाई की जा सकती है। इस काम में डिप्टी जेलर का भी सहयोग मिल रहा है।

20 से 250 रुपये तक के उत्पाद

क्रोशिया से तैयार सामान की कीमत उसके डिजाइन और मेहनत के अनुसार से तय की जाती है। कुछ उत्पाद 20 रुपये के हैं, तो कुछ 50 रुपये के। वहीं कई आकर्षक और मेहनत वाले उत्पादों की कीमत 200 से 250 रुपये तक है। इन सामानों को बिक्री के लिए रखा जा रहा है, जिससे महिलाओं को अपने काम का आर्थिक लाभ भी मिल रहा है।

हर महीने 4 से 5 हजार रुपये तक की कमाई

पूजा राणा के अनुसार, क्रोशिया का काम करने वाली महिला बंदियां वर्तमान में करीब 4 से 5 हजार रुपये तक कमा रही हैं। यह पहल केवल कमाई तक सीमित नहीं है। इसका उद्देश्य महिलाओं को ऐसा हुनर देना है, जिसे वे जेल से बाहर आने के बाद भी अपने रोजगार का साधन बना सकें।