मुरादाबाद, उत्तर प्रदेश
सोचिए जिसे हम बेकार समझकर फेंक देते हैं। उसी से अगर हर महीने 25 हजार रुपये की कमाई होने लगे तो? जी हाँ, मुरादाबाद की 12 महिलाओं ने ऐसा ही कमाल कर दिखाया है। गाय के गोबर और फूल-पत्तियों से ये महिलाएं बना रही हैं खास ‘हवन टिकली’, जिसकी नवरात्रि में जबरदस्त डिमांड है। पीतल नगरी मुरादाबाद में अब सिर्फ पीतल ही नहीं बल्कि ईको-फ्रेंडली स्वरोजगार की खुशबू भी फैल रही है। यहां ‘शुभ स्वयं सहायता समूह’ की 12 महिलाओं ने मिलकर पारंपरिक संसाधनों को आधुनिक बाजार से जोड़ दिया है। समूह की शुरुआत पूजा यादव ने की और आज प्रत्येक महिला अपनी जिम्मेदारी निभा रही है। कोई गाय के गोबर को सुखाकर तैयार करती है, तो कोई सूखे फूल-पत्तियों और हवन सामग्री को मिलाकर सुंदर टिकली बनाती है। जैसे-जैसे नवरात्रि नजदीक आती है। इनकी हवन टिकली की मांग तेजी से बढ़ जाती है। महिलाएं स्थानीय बाजार में स्टॉल लगाकर भी बेच रही हैं और साथ ही सोशल मीडिया व फोन कॉल के जरिए ऑनलाइन ऑर्डर भी ले रही हैं। यानी गांव का हुनर अब डिजिटल बाजार तक पहुंच चुका है। इस काम से अब हर महिला महीने के 20 से 25 हजार रुपये तक कमा रही है। सबसे अच्छी बात यह महिलाएं दूसरी महिलाओं को भी यह काम सिखाकर रोजगार से जोड़ रही हैं।मुरादाबाद की ये महिलाएं साबित कर रही हैं कि अगर हौंसला मजबूत हो तो गोबर और फूल-पत्तियां भी बन सकती हैं एक सफल स्टार्टअप।



