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मजबूत एवं आत्मनिर्भर भारत का खाका

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मजबूत एवं आत्मनिर्भर भारत का खाका

केन्द्रीय बजट 2026-27 एक सामान्य बजट नहीं है। यह ऐसे समय में प्रस्तुत हुआ है जब भारत एक निर्णायक मोड़ पर खड़ा है। वैश्विक परिदृश्य अनिश्चित है। व्यापार युद्ध, शुल्क बाधाएं और बदलती आपूर्ति श्रृंखलाएं उभरती अर्थव्यवस्थाओं की शक्ति की परीक्षा ले रही हैं। ऐसे समय में यह बजट एक अल्पकालिक दस्तावेज नहीं, बल्कि दीर्घकालिक विकास का खाका प्रस्तुत करता है।

पहली बार कर्तव्य भवन में तैयार किया गया यह बजट तीन स्पष्ट कर्तव्यों से प्रेरित है। पहला, उत्पादकता और प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार के माध्यम से आर्थिक विकास को गति देना और उसे स्थायी बनाना। दूसरा, लोगों की आकांक्षाओं को पूरा करना, उनकी क्षमता का निर्माण करना और उन्हें विकास का सक्रिय भागीदार बनाना। तीसरा, सबका साथ, सबका विकास की भावना के अनुरूप यह सुनिश्चित करना कि हर परिवार, क्षेत्र और क्षेत्रीय इकाई भारत की विकास यात्रा में सार्थक भागीदारी करे।

सार्थक अवसंरचना निवेश के माध्यम से विकास: बजट 2026 का एक प्रमुख विषय पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) में उल्लेखनीय वृद्धि है। सरकार ने एक बार फिर लोकलुभावन घोषणाओं के बजाय अनुशासित व्यय को प्राथमिकता दी है। सड़कों, रेल, लॉजिस्टिक कॉरिडोर, डिजिटल कनेक्टिविटी और बंदरगाहों जैसी अवसंरचना में व्यापक निवेश इस विकास कथा की आधारशिला है।

पूंजीगत व्यय बहुगुणक प्रभाव उत्पन्न करता है। अवसंरचना पर खर्च किया गया प्रत्येक रुपया रोजगार सृजन करता है, इस्पात और सीमेंट जैसे संसाधनों की मांग बढ़ाता है तथा दीर्घकालिक उत्पादकता को सुदृढ़ करता है। केवल उपभोग पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय यह बजट अर्थव्यवस्था की बुनियाद को मजबूत करता है।

विनिर्माण, प्रौद्योगिकी और वैश्विक मूल्य श्रृंखलाएं - बजट 2026 भारत की वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनने की महत्वाकांक्षा को और सुदृढ़ करता है। जोर केवल आयातित घटकों के संयोजन पर नहीं, बल्कि प्रौद्योगिकी आधारित मूल्य श्रृंखलाओं को गहराई देने पर है।

भारत का सेमीकंडक्टर मिशन निरंतर नीतिगत समर्थन प्राप्त कर रहा है। ऐसे समय में जब सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखलाएं रणनीतिक परिसंपत्ति बन चुकी हैं, यह अत्यंत महत्वपूर्ण है। उच्च-प्रौद्योगिकी विनिर्माण पारितंत्र को मजबूत कर भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, उन्नत विनिर्माण और रक्षा उत्पादन जैसे भविष्य के प्रतिस्पर्धी क्षेत्रों में अपनी स्थिति सुदृढ़ करना चाहता है। संदेश स्पष्ट है-भारत अल्पकालिक लाभ से आगे सोच रहा है।

रक्षा: शक्ति के साथ आत्मनिर्भरता: रक्षा क्षेत्र को 7.85 लाख करोड़ रुपये का सर्वाधिक आवंटन प्राप्त हुआ है। अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता और ऑपरेशन सिंदूर के बाद रक्षा तैयारियों को मजबूत करना विकल्प नहीं, बल्कि अनिवार्यता है। यह आवंटन आधुनिकीकरण, स्वदेशी विनिर्माण और प्रौद्योगिकीय विकास को समर्थन देता है। यह रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता के व्यापक प्रयासों के अनुरूप है, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा और औद्योगिक विकास साथ-साथ आगे बढ़ें।

ग्रामीण सशक्तिकरण: ग्रामीण रोजगार ढांचे में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका (ग्रामीण) अथवा VB-G RAM G के रूप में दिखाई देता है। 95,692.31 करोड़ रुपये के आवंटन तथा अतिरिक्त कार्यक्रम व्यय के साथ कुल राशि 1.51 लाख करोड़ रुपये से अधिक पहुंचती है। यह दृष्टिकोण में बदलाव का संकेत है। केवल मजदूरी पर केंद्रित रहने के बजाय ग्रामीण हाट, कार्यशालाएं, प्रशिक्षण केंद्र और आजीविका को टिकाऊ बनाने वाली अवसंरचना के निर्माण पर बल दिया गया है।

विशेष रूप से महिलाओं के सशक्तिकरण पर इसका जोर ग्रामीण विकास को समावेशी और परिवर्तनकारी बनाता है।

स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण: मानव पूंजी का निर्माण - मजबूत मानव पूंजी के बिना आर्थिक विकास अधूरा है। इसे ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य क्षेत्र को 1.06 लाख करोड़ रुपये, जो कुल बजट का लगभग 1.96 प्रतिशत है, आवंटित किए गए हैं।

जिला अस्पतालों में आपातकालीन और ट्रामा देखभाल क्षमता में 50 प्रतिशत विस्तार किया जाएगा, जो छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में जीवनरक्षक उपचार की उपलब्धता को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

सरकार अगले पांच वर्षों में एक लाख सहयोगी स्वास्थ्य पेशेवरों को जोड़ने और 1.5 लाख केयरगिवर्स को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखती है। साथ ही 17 महत्वपूर्ण दवाओं, जिनमें कैंसर उपचार संबंधी औषधियां भी शामिल हैं, पर सीमा शुल्क को शून्य किया गया है। जीवनरक्षक दवाओं को सुलभ बनाकर यह बजट गंभीर रोगों से जूझ रहे परिवारों के बोझ को कम करता है।

शिक्षा और कृषि अनुसंधान: ज्ञान में निवेश - बजट 2026 राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को निरंतर समर्थन देता है, जिसमें अवसंरचना, शिक्षक प्रशिक्षण और प्रणालीगत सुधार पर बल है। शिक्षा को सामान्य व्यय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय क्षमता में दीर्घकालिक निवेश के रूप में देखा गया है।

कृषि क्षेत्र में कृषि शिक्षा और अनुसंधान के लिए 9,967 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। कृषि पद्धतियों, फसल विज्ञान और प्रौद्योगिकी में नवाचार खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने और किसानों की आय बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण होंगे।

इसके साथ ही 1,70,944 करोड़ रुपये की उर्वरक सब्सिडी वैश्विक मूल्य अस्थिरता के बीच किसानों को स्थिरता प्रदान करती है। यह दृष्टिकोण सुधार और संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करता है।

नागरिक-केंद्रित सुधार: बड़े अवसंरचनात्मक और औद्योगिक प्रयासों के साथ-साथ बजट परिवारों और व्यक्तिगत योगदानकर्ताओं को सशक्त बनाने वाले सुधार भी प्रस्तुत करता है। आयकर व्यवस्था में बदलाव अनुपालन प्रक्रियाओं को सरल बनाने, समयसीमा बढ़ाने और TDS-TCS प्रावधानों को युक्तिसंगत करने का प्रयास करते हैं।

जब विश्व की अनेक सरकारें अल्पकालिक लाभों की ओर झुकती दिखाई देती हैं, तब बजट 2026-27 एक अलग दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है। यह तात्कालिक लोकप्रियता के लिए बनाया गया ”फ्रीबी“ बजट नहीं, बल्कि एक संरचित, अनुशासित और दूरदर्शी दस्तावेज है।

पूंजी निर्माण, विनिर्माण पारितंत्र, ग्रामीण अवसंरचना, रक्षा तैयारियों, स्वास्थ्य और शिक्षा सुधारों को प्राथमिकता देकर यह बजट अस्थिर वैश्विक परिस्थितियों के बीच लचीलापन विकसित करने का प्रयास करता है। 

आगे की राह: बजट 2026 एक स्पष्ट संदेश देता है-भारत क्षमता से आगे बढ़ेगा, न कि आत्मसंतोष से; अवसंरचना के माध्यम से, न कि तात्कालिक उपायों से; सशक्तिकरण के द्वारा, न कि निर्भरता से।

विकास, आकांक्षा और समावेशन इन तीन कर्तव्यों पर आधारित यह बजट केवल अगले वित्तीय वर्ष के लिए नहीं, बल्कि अगले दशक के लिए भारत को तैयार करने का प्रयास है। यदि इसे उसी अनुशासन के साथ लागू किया गया, जिस दृष्टि से इसे तैयार किया गया है, तो बजट 2026-27 एक सशक्त, प्रतिस्पर्धी और वास्तविक अर्थों में विकसित भारत की दिशा में मील का पत्थर सिद्ध हो सकता है।