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ऋषिकेश में 80 देशों के 1500 योग साधकों ने एक साथ किया योग

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ऋषिकेश, उत्तराखण्ड

परमार्थ निकेतन में आयोजित सात दिवसीय अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव का समापन बेहद भव्य और प्रेरणादायक रहा। यह महोत्सव न केवल योग की शक्ति को दर्शाता है, बल्कि दुनिया भर के लोगों को एकता और शांति का संदेश भी देता है। अंतिम दिन गंगा तट पर 80 देशों के करीब 1500 योग साधकों ने एक साथ योग किया। सभी ने योग को अपने जीवन का हिस्सा बनाने का संकल्प लिया और वसुधैव कुटुंबकमयानी पूरी दुनिया एक परिवार है, इस भावना को आगे बढ़ाने का संदेश दिया।


पहले सामूहिक योग सत्र से कार्यक्रम की शुरुआत हुई और अंत में गंगा आरती, संगीत और नृत्य के साथ समापन हुआ। इस अवसर पर स्वामी चिदानंद सरस्वती और साध्वी डा. भगवती सरस्वती भी मौजूद रहे। विभिन्न देशों से आए लोगों ने मिलकर विश्व शांति के लिए प्रार्थना की और महायज्ञ में भाग लिया। स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि भारत केवल एक देश नहीं, बल्कि एक ऐसी भावना है जो सबको जोड़ती है। योग मन, आत्मा और पूरी मानवता को जोड़ने का माध्यम है। उन्होंने बताया कि जब अलग-अलग देशों और संस्कृतियों के लोग एक साथ गंगा किनारे बैठकर ध्यान और साधना करते हैं, तो यह साफ दिखता है कि योग की कोई सीमा नहीं होती।


आज के समय में जब दुनिया में कई तरह के संघर्ष चल रहे हैं, ऐसे में यह योग महोत्सव शांति का मजबूत संदेश देता है। यहां आने वाले लोग किसी देश के प्रतिनिधि नहीं, बल्कि मानवता के साधक बनकर आते हैं।