आईएमए से पहली बार नौ महिला अफसर बनीं लेफ्टिनेंट, सेना को मिले 481 नए अधिकारी
देहरादून स्थित भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) के इतिहास में शनिवार का दिन स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हो गया। पहली बार अकादमी से प्रशिक्षण पूरा कर नौ महिला कैडेट भारतीय सेना में अधिकारी के रूप में शामिल हुईं। पासिंग आउट परेड के साथ उन्होंने लेफ्टिनेंट का पद प्राप्त कर सैन्य जीवन की नई शुरुआत की। यह उपलब्धि न केवल भारतीय सेना बल्कि देश में महिला सशक्तिकरण की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
इस ऐतिहासिक समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। उन्होंने कहा कि सैन्य वर्दी में नारी शक्ति का बढ़ता प्रतिनिधित्व प्रगतिशील भारत का प्रतीक है। उन्होंने इसे महिला नेतृत्व वाले विकास की दिशा में एक प्रेरणादायक उपलब्धि बताया।
परेड में कुल 515 कैडेट पास आउट हुए, जिनमें 481 भारतीय और 34 विदेशी कैडेट शामिल रहे। प्रशिक्षण के दौरान उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले पटना के कैडेट विशाल कुमार को प्रतिष्ठित ‘स्वार्ड ऑफ ऑनर’ और ‘गोल्ड मेडल’ से सम्मानित किया गया।
राष्ट्रपति ने नव नियुक्त अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि नेतृत्व केवल आदेश देने तक सीमित नहीं होता, बल्कि चरित्र, करुणा और पूर्ण समर्पण का परिचायक है। उन्होंने अधिकारियों को देश सेवा को सर्वोच्च कर्तव्य मानने की प्रेरणा दी। अंतिम पग पार करते ही युवा अधिकारियों के सम्मान में हेलीकॉप्टरों से पुष्पवर्षा की गई, जिसने समारोह को और भी यादगार बना दिया।
इस अवसर पर उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त), मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, सेना प्रशिक्षण कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल देवेंद्र शर्मा तथा कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारी उपस्थित रहे। राष्ट्रपति ने बदलते वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय सेना को नई तकनीकों और उभरती चुनौतियों के लिए सदैव तैयार रहना होगा।



