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मथुरा में मिली 3000 वर्ष पुरानी शिव-पार्वती की प्रतिमा, साथ में मिला ऊर्ध्वाधर लिंग

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- पुरातत्वविदों के अनुसार, यह खोज लगभग 1000 ईसा पूर्व की है

- शिवलिंग प्राचीन शिव उपासना और वैदिक परंपराओं का प्रमाण

मथुरा। पुरातत्व विभाग को मथुरा के पास एक महत्वपूर्ण खोज में शिव और पार्वती की 3000 वर्ष पुरानी दुर्लभ प्रतिमा मिली है। इसके साथ ही खुदाई में एक ऊर्ध्वाधर लिंग भी प्राप्त हुआ है, जिसे प्राचीन शिव उपासना से जुड़ा माना जा रहा है।

क्या है खोज में खास -

1. शिव-पार्वती की प्रतिमा: यह प्रतिमा प्राचीन भारतीय कला और धर्म की एक महत्वपूर्ण कड़ी है। प्रतिमा में शिव और पार्वती को पारंपरिक मुद्रा में दर्शाया गया है, जो उनकी दिव्यता और सामंजस्य को प्रकट करता है।

2. ऊर्ध्वाधर लिंग: इस लिंग का आकार और संरचना इसे अनूठा बनाते हैं। यह शिवलिंग प्राचीन शिव उपासना और वैदिक परंपराओं का प्रमाण देता है।

3. 3000 वर्ष पुरानी कृति: पुरातत्वविदों के अनुसार, यह खोज लगभग 1000 ईसा पूर्व की है, जो इसे भारतीय इतिहास में अत्यंत प्राचीन और मूल्यवान बनाती है।

धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व -

यह खोज शिव और पार्वती की उपासना से जुड़े अनुष्ठानों और प्रथाओं को समझने में मदद करेगी। साथ ही, यह मथुरा क्षेत्र की प्राचीन धार्मिक परंपराओं और उनकी गहराई को दर्शाती है।

आगे की प्रक्रिया -

प्रतिमा और लिंग को पुरातत्व संग्रहालय में संरक्षित किया जाएगा। विशेषज्ञ इनकी संरचना और महत्व का अध्ययन कर रहे हैं। यह खोज भारतीय संस्कृति और धर्म के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ सकती है।

यह खोज न केवल धार्मिक आस्था को प्रबल करेगी, बल्कि मथुरा के ऐतिहासिक महत्व को भी नई पहचान दिलाएगी।