खटीमा, उत्तराखण्ड
साजिशें रची गईं, प्रलोभन दिए गए! लेकिन जब सनातन का स्वाभिमान जागता है, तो हर साजिश रेत के महल की तरह ढह जाती है! उत्तराखण्ड के खटीमा के कुटरी गांव में हरेला पर्व के अवसर पर 70 थारू जनजाति के लोगों ने वैदिक रीति-रिवाज से आयोजित शुद्धिकरण यज्ञ में भाग लिया।
अपनी जड़ों को भूल ईसाई मत अपना चुके इन भाई-बहनों का स्व जागा, तो अब कलावा बांधकर, चरणामृत ग्रहण कर गर्व से अपने मूल 'सनातन धर्म' में घर वापसी कर ली है।
बता दें, कुछ समय पहले इन्हीं लोगों के मतांतरण का मामला सामने आया
था, जिसके बाद पुलिस ने आरोपियों के विरुद्ध कार्रवाई भी की थी। बाद में
ग्राम प्रधान और स्थानीय लोगों ने प्रभावित परिवारों से संवाद किया और इन परिवारों
ने स्वेच्छा से सनातन धर्म में लौटने का निर्णय लिया।
भारत का संविधान हर नागरिक को अपनी इच्छा से किसी भी मत को मानने की
स्वतंत्रता देता है। लेकिन मत परिवर्तन बल, प्रलोभन, धोखे
या अनुचित दबाव बनाकर कराया जाए, तो उत्तराखण्ड धर्म स्वतंत्रता अधिनियम, 2018 के
तहत यह गंभीर अपराध है। ऐसे मामलों में 1 से 7
साल तक की जेल और भारी जुर्माने का भी प्रावधान है।
साथ ही कुटरी गांव की प्रधान दीपा देवी ने लोगों से अपील करते हुए कहा है कि अपनी संस्कृति और परंपराओं के प्रति जागरूक रहें। किसी भी लालच, बहकावे या प्रलोभन में न आएं, और ऐसी किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत प्रशासन को दें। यह केवल घर वापसी नहीं, यह सनातन के गौरव का पुनरुत्थान है। अपने धर्म को पहचानें, अपनी संस्कृति की रक्षा करें।



