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उत्तराखण्ड बोर्ड का बड़ा निर्णय: अब गणित-विज्ञान के छात्र भी पढ़ेंगे संस्कृत

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देहरादून, उत्तराखण्ड

संस्कृत भाषा भारतीय संस्कृति, ज्ञान और परंपरा की आधारशिला मानी जाती है। इसी भाषा को नई पीढ़ी से जोड़ने और छात्रों में इसके प्रति रुचि बढ़ाने के लिए उत्तराखण्ड में एक अहम कदम उठाया गया है।

जानकारी के अनुसार, उत्तराखण्ड विद्यालयी शिक्षा परिषद ने कक्षा 12 के हिंदी भाषा पाठ्यक्रम में शामिल अनिवार्य संस्कृत खण्ड के लिए ‘निर्झरा-2’ पुस्तक को अनिवार्य कर दिया है। साथ ही परिषद ने स्पष्ट किया है कि वर्ष 2027 की बोर्ड परीक्षा में हिंदी विषय के अनिवार्य संस्कृत भाग से संबंधित प्रश्न इसी पुस्तक से पूछे जाएंगे।

परिषद के सचिव विनोद कुमार ढौंडियाल ने इस संबंध में सभी मुख्य शिक्षा अधिकारियों को पत्र भेजकर अपने-अपने जिलों के इंटर कॉलेजों के प्रधानाचार्यों को आवश्यक निर्देश देने को कहा है।

वही परिषद के अनुसार, (SCERT) देहरादून ने इंटरमीडिएट स्तर पर हिंदी भाषा और कृषि हिंदी विषय के अनिवार्य संस्कृत भाग के लिए ‘निर्झरा-1’ और ‘निर्झरा-2’ नाम से दो पाठ्य पुस्तकें तैयार की हैं। इनमें से ‘निर्झरा-1’ का अध्ययन कक्षा 11 में वर्ष 2025-26 से कराया जा रहा है, जबकि वर्तमान शैक्षिक सत्र से कक्षा 12 में ‘निर्झरा-2’ लागू होगी।

नई व्यवस्था के तहत सभी विद्यालयों में इसी पुस्तक के आधार पर पढ़ाई कराई जाएगी। परिषद ने यह भी स्पष्ट किया है कि वर्ष 2027 की कक्षा 12 की बोर्ड परीक्षा में हिंदी भाषा के अनिवार्य संस्कृत भाग के प्रश्न केवल ‘निर्झरा-2’ से पूछे जाएंगे।

वहीं, कृषि हिंदी विषय के छात्रों के लिए अनिवार्य संस्कृत भाग के प्रश्न ‘निर्झरा-1’ और ‘निर्झरा-2’ दोनों पुस्तकों से शामिल किए जाएंगे। परिषद ने सभी विद्यालयों को समय रहते नई व्यवस्था के अनुसार शिक्षण कार्य शुरू करने के निर्देश दिए हैं।