• अनुवाद करें: |
मुख्य समाचार

एक एजेंडा के तहत समाज में संभ्रम की स्थिति पैदा करने का प्रयास हुआ - दत्तात्रेय होसबाले जी

  • Share:

  • facebook
  • twitter
  • whatsapp

नई दिल्ली

विश्व पुस्तक मेले में ‘मंत्र-विप्लव पुस्तक का लोकार्पण

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले जी ने भारत मंडपम में चल रहे विश्व पुस्तक मेले में आजमंत्रविप्लव पुस्तक का लोकार्पण किया। तरुण विजय द्वारा लिखित एवं प्रभात प्रकाशन द्वारा प्रकाशित पुस्तक के विमोचन समारोह में राज्यसभा सांसद डॉ. सुधांशु त्रिवेदी, पुस्तक के लेखक तरुण विजय तथा प्रभात प्रकाशन के चेयरमैन प्रभात कुमार भी उपस्थित थे। पुस्तक लोकार्पण समारोह में सरकार्यवाह जी ने कहा कि भारत की परंपरा ज्ञान की परंपरा है। इसी से यश, वैभव सभी की प्राप्ति हुई। अपने पूर्वजों को इस विषय पर स्पष्टता थी। ज्ञान व्यक्ति को सही दिशा में ले जाता है। लेकिन, ज्ञान के साथ भक्ति की भी आवश्यकता होती है क्योंकि बिना भक्ति के ज्ञान से अहंकार जाता है। उन्होंने कहा कि महर्षि अरविन्दो ने स्वतंत्र भारत में तीन कार्य करने की आवश्यकता बताई थी। पहला, अपने देश की बिखरी पड़ी प्राचीन ज्ञान परंपरा एकत्र करना चाहिए। दूसरा, उसको आज के समय के अनुरूप जीवन उपयोगी तथा मानव उपयोगी बनाना होगा। तथा तीसरा, नए ज्ञान का सृजन भी करना है। सरकार्यवाह जी ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा के शब्दों के बारे में अभी बहुत अध्ययन होना बाकी है। गलत विमर्श गढ़ने के प्रयासों पर उन्होंने कहा कि सत्य और इतिहास को विकृत करते हुए प्रस्तुत करने का कलुषित प्रयास हुआ है। यह सब अज्ञान के कारण नहीं, अपितु एक एजेंडा के तहत हुआ है। समाज में संभ्रम की स्थिति पैदा करने का प्रयास हुआ। जैसे-जैसे दूसरों का हमारे मन  बुद्धि पर नियंत्रण होता गया, मंत्र-विप्लव की स्थिति पैदा होती गई। सम्मोह से बुद्धि का नाश होता है तथा बुद्धि के नाश से सर्वनाश होता है।

सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि हमारे समाज के बौद्धिक प्रतिष्ठान का एक हिस्सा एम फैक्टर (मैकाले, मुगल एवं मार्क्स) से एडिक्ट हो गया है। समाज के समक्ष दो प्रकार की चुनौतियाँ है, एक जो दिखाई देता है तथा दूसरा जो संक्रमण की तरह दिखाई नहीं देता है। मंत्रविप्लव, नहीं दिखाई देने वाली चुनौतियों को रेखांकित करता है तथा उनसे निपटने का मार्ग भी दिखाता है। 


पुस्तक के लेखक तरुण विजय ने मंत्र  विप्लव पुस्तक के विषय वस्तु पर प्रकाश डाला। महात्मा विदुर ने धृतराष्ट्र से कहा था - 'विष की एक बूँद जिसे दी जाए, उससे केवल वही एक व्यक्ति मरता है। विषैला तीर जिस व्यक्ति पर आघात करे, उससे भी केवल वही एक व्यक्ति मारा जाता है, पर अगर विचार ही भ्रष्ट हो जाए और उसकी समझ में राजा और प्रजा में संभ्रम निर्माण हो तो हे धृतराष्ट्र, उस समय मंत्र-विप्लव की स्थिति पैदा होती है, जिसमें राजा, प्रजा और राष्ट्र-तीनों का नाश हो जाता है।' पुस्तक में उसी मंत्र-विप्लव की स्थिति का प्रतिकार है। उस स्थिति को रोकने, टालने का जतन है।