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भटके कदमों को राह दिखायेंगी किताबें

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भटके कदमों को राह दिखायेंगी किताबें 


कहते हैं किताबें मनुष्य की सबसे अच्छी मित्र होती हैं। किताबे हमारे जीवन में ज्ञान का प्रकाश लाती हैं। विश्व के बहुत से लोगों का जीवन किसी पुस्तक को पढ़कर ही बदला है। पुस्तकों से जीवन को एक नई पहचान देने का एक ऐसा ही प्रयास हुआ है उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा के बंदीगृह में। यहाँ जेल में प्रमुख सचिव कारागार अनिल गर्ग और शारदा विश्वविद्यालय के कुलपति पी.के. गुप्ता ने इस डिजिटल लाइब्रेरी का उद्घाटन किया।




जेल प्रशासन की इस मुहीम में प्रोमेटियस स्कूल नोएडा के प्रबंधन और  छात्रों ने भी सहयोग किया है। आपको बता दें कि इस डिजिटल लाइब्रेरी में जेल के बंदी कंप्यूटर प्रोजेक्टर के माध्यम से किताबें पढ़ सकेंगे। वे मोटिवेशनल स्पीच और वीडियो भी देख सकेंगे। इस अच्छे काम के लिए समाज से भी सहयोग मिला है। पुस्तकालय के लिए स्कूल के बच्चों और अभिभावकों ने पुस्तकें दान की हैं।



समाज के सहयोग से जेल के बंदियों के लिए शिक्षा, योग, कौशल विकास, और मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित अनेक गतिविधियाँ चलाई जा रही हैं। किसी भी कारण से रास्ता भटक गये अपने ही भाइयों को समाज की मुख्यधारा में लाने के लिए ऐसे प्रयासों की महती आवश्यता है। समाज और प्रशासन द्वारा परस्पर सहयोग से किया जा रहा यह संयुक्त प्रयास प्रशंसनीय और अनुकरणीय है।