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चमोली के किसानों ने अपनाई मशरूम खेती

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चमोली, उत्तराखण्ड 

उत्तराखण्ड के चमोली जिले के गैरसैंण में किसान ने ऐसा तरीका अपनाया है। जिससे न केवल आमदनी बढ़ी है, बल्कि सेहत में भी सुधार आ रहा है। मेहलचौरी क्षेत्र में उद्यान सचल दल केंद्र की पहल से स्थानीय काश्तकार बड़े पैमाने पर सफेद बटन मशरूम का उत्पादन कर रहे हैं। केंद्र प्रभारी आशीष कुमार और उनकी टीम के मार्गदर्शन में किसान वैज्ञानिक तकनीक से मशरूम उगा रहे हैं। जिससे सीमित संसाधनों में भी अच्छी आमदनी हो रही है। आशीष कुमार का कहना है कि अब तक करीब एक दर्जन काश्तकार 26 क्विंटल मशरूम इकाइयां स्थापित कर चुके हैं और लगातार उत्पादन बढ़ रहा है। सफेद बटन मशरूम को सुपरफूड माना जाता है। इसमें प्रोटीन, विटामिन B और D, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट भरपूर होते हैं।  जो इम्युनिटी बढ़ाने, दिल को स्वस्थ रखने और वजन नियंत्रित करने में मदद करते हैं। कुछ किसान अब मशरूम से अचार बनाकर भी कमाई बढ़ा रहे हैं और सबसे बड़ी बात यह कम लागत के साथ-साथ कम जगह में भी सफेद बटन मशरूम का उत्पादन हो जाता है बस चाहिए– भूसा, कम्पोस्ट और मशरूम का बीज, तीनों मिश्रण को एक बैग में भरो बीज डालो  और 10–15 दिन में सफेद परत यानि बेस तैयार। 20–25 दिन में ताजे मशरूम उगने लगते हैं हर बैग से 300–500 ग्राम हर हफ्ते उत्पादन होता है बस ध्यान रखें 80-90% नमी हो मशरूम उत्पादन के प्रोसेस में तापमान 14-18°C हो  प्रतिदिन हल्का पानी जरूर स्प्रे करें हर बैग से हफ्ते में 300 से 500 ग्राम तक मशरूम तैयार हो रहा है। जिसका बाजार मूल्य लगभग 250 रुपए प्रति किलो है। कुल मिलाकर सफेद बटन मशरूम की खेती पहाड़ों में किसानों के लिए कम जगह और कम लागत में अधिक आमदनी का मजबूत विकल्प बनती जा रही है।