अमेरिकी यहूदी लेखिका डेना मरियम की पुस्तक के मराठी अनुवाद ‘न सांगितलेली सीतेची कथा’ का विमोचन
पुणे, 28 मई, 2026। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय कार्यकारिणी के सदस्य भय्याजी जोशी ने कहा कि “रामायण केवल प्रभु श्री रामचंद्र का जीवन नहीं है, बल्कि ‘राम-जानकी’ की मिली-जुली जीवनी है। सीता के उल्लेख के बिना राम की जीवनी कभी पूरी नहीं हो सकती। आज भी इन दोनों का चरित्र व्यावहारिक और सामाजिक जीवन के हर क्षेत्र में हमारा मार्गदर्शन करता है। इसलिए, रामायण को केवल आस्था के दृष्टिकोण से नहीं, बल्कि खुली दृष्टि से पढ़ना चाहिए।

अमेरिकी यहूदी लेखिका डेना मरियम की पुस्तक The Untold Story of Sita के मराठी अनुवाद ‘न सांगितलेली सीतेची कथा’ का विमोचन भय्याजी जोशी ने एमआईटी विश्वशांति विश्वविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में किया। मोतीलाल बनारसीदास पब्लिशर्स, भारतीय विचार साधना और एमआईटी विश्वशांति विश्वविद्यालय ने संयुक्त रूप से कार्यक्रम का आयोजन किया। भारतीय विचार साधना के कार्यवाह काशिनाथ देवधर, एमआईटी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. आर. एम. चिटणीस तथा वरिष्ठ व्याख्याता संजय उपाध्याय मंच पर उपस्थित रहे।
भय्याजी जोशी ने कहा कि विदेशी संस्कारों में पली-बढ़ी एक महिला द्वारा सीता के जीवन पर पुस्तक लिखना, यह उनकी आध्यात्मिक साधना ही है। आज की युवा पीढ़ी को देश और समाज की समस्याओं को समझने के लिए समाज में सीधे घुलना-मिलना चाहिए, यही आदर्श हमें रामायण में दिखाई देता है। यदि मनुष्य अपनी सीमाओं का पालन नहीं करता है, तो विनाश अवश्यंभावी है। प्रभु श्रीराम ने आम जनता के रूप में संगठित समाज की शक्ति का प्रकटीकरण किया, जिसका प्रतीक ‘रामसेतु’ है।

भय्याजी जोशी ने कहा कि आज हमें केवल जानकारी बढ़ाने वाली शिक्षा नहीं चाहिए, बल्कि एक विचारोत्तेजक शिक्षा प्रणाली की आवश्यकता है। छत्रपति शिवाजी महाराज ने रामराज्य की अवधारणा को धरातल पर उतारने का ऐतिहासिक कार्य किया। आज विश्व में दुष्ट शक्तियों के हाथ में शस्त्र केवल विनाश का संकेत बनते जा रहे हैं।

संजय उपाध्याय ने कहा कि भगवान श्रीराम एक महान व्यक्तित्व हैं जो शत्रुओं के प्रति भी कड़वाहट नहीं रखते। आज के समय में भारतीयों के मन में राम के प्रति उपेक्षा पैदा करने के कुटिल प्रयास किए जा रहे हैं। सीता की भूमिका जड़ों की तरह जमीन के नीचे गहरे तक पैठ बना चुकी है। उसका सारांश आज की पीढ़ी को समझना चाहिए।
कुलपति डॉ. आर. एम. चिटणीस ने पुस्तक में उल्लेखित पर्यावरण संरक्षण के मूल्यों पर प्रकाश डाला। श्री काशिनाथ देवधर ने कहा – भारतीय विचार साधना समाज को एकजुट और सामंजस्यपूर्ण रखने के लिए लोगों तक विचार पहुंचाने का काम कर रही है। मिलिंद पात्रे ने आभार प्रदर्शित किया।