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सहारनपुर से अमेरिका तक: हर्षिता अरोड़ा की प्रेरणादायक कहानी

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सहारनपुर, उत्तर प्रदेश

सहारनपुर की गलियों से निकली एक लड़की, जिसने भीड़ से अलग चलने का फैसला किया। जहां बाकी बच्चे किताबों में उलझे थे वहीं सहारनपुर की हर्षिता कोडिंग में खोई रहती थीं। हर्षिता ने महज 13 साल की उम्र में कोडिंग सीख ली और 15 साल की उम्र में एक बड़ा फैसला लिया - स्कूल छोड़ने का। 13 साल की उम्र में कोडिंग सीखी और 15 में स्कूल जाना छोड़ दिया और फिर आया वो पल, जिसने हर्षिता की जिंदगी बदल दी। केवल 16 साल की उम्र में उन्होंने एक क्रिप्टो पोर्टफोलियो ट्रैकर ऐप बनाया, जो 32 देशों की 1000 से अधिक क्रिप्टोकरेंसी का लाइव अपडेट देता था। लॉन्च के कुछ ही हफ्तों में यह ऐप Apple App Store के टॉप पेड ऐप्स में शामिल हो गया।इस उपलब्धि के लिए हर्षिता को बाल शक्ति पुरस्कारसे भी सम्मानित किया गया। जहां एक तरफ लोग डिग्री के पीछे भागते हैं। वहीं हर्षिता अरोड़ा ने अपने टैलेंट के दम पर एक अलग रास्ता चुना और वही रास्ता उन्हें सीधे अमेरिका तक ले गया।

हर्षिता को मिला O-1 वीजा और उन्होंने सिलिकॉन वैली का रुख किया। उन्होंने दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित स्टार्टअप एक्सेलेरेटरवाई कॉबिनेटर में आवेदन किया। लेकिन शुरुआत आसान नहीं थी। उनका पहला स्टार्टअप महज 3 हफ्तों में फेल हो गया। हर्षिता ने हार नहीं मानी। उन्होंने सड़कों पर जाकर ट्रक ड्राइवरों से बात की और एक बड़ी समस्या को पहचाना। इसी से जन्म हुआ-AtoB का जिसे ट्रकिंग इंडस्ट्री का Stripe’ कहा जाता है। एक ऐसा फ्यूल कार्ड जिसने पेमेंट सिस्टम को आसान और पारदर्शी बना दिया। आज AtoB की वैल्यूएशन करीब 750 मिलियन डॉलर। यानी लगभग 6300 करोड़ रुपये है और यह कंपनी अमेरिका में 30,000 से ज्यादा फ्लीट मालिकों को सेवा दे रही है। सहारनपुर की गलियों से सिलिकॉन वैली तक का ये सफर केवल एक लड़की की सफलता की कहानी नहीं, बल्कि उन तमाम युवाओं के लिए एक संदेश है- कि अगर आप कुछ बड़ा करना चाहते हैं, तो रास्ते खुद बन जाते हैं। कहते हैं कि अगर आपके पास हुनर और जुनून हो, तो डिग्रियां मायने नहीं रखतीं।