चमोली,उत्तराखण्ड
कभी जिस भोजपत्र पर वेद और पुराण लिखे जाते थे। आज वही 20 हजार की लग्जरी वॉल क्लॉक बनकर घरों की शोभा बढ़ा रहा है। और ये कमाल किया है उत्तराखण्ड की एक युवा बेटी ने। चमोली के रैणी गाँव की निकिता रावत हिमालय में करीब 4500 मीटर की ऊंचाई पर मिलने वाले ‘बेटुला यूटिलिस’ पेड़ की छाल यानी भोजपत्र से घड़ियां, बुकमार्क, रिद्धि-सिद्धि यंत्र और नेम प्लेट जैसे यूनिक प्रोडक्ट बना रही हैं। भोजपत्र यानी वही छाल जिस पर प्राचीन काल में वेद, पुराण और शास्त्र लिखे जाते थे।
लेकिन आज की पीढ़ी इसे भूलती जा रही थी।तभी साइंस स्टूडेंट निकिता ने सोचा, अगर विरासत को बचाना है तो उसे लाइफस्टाइल का हिस्सा बनाना होगा। बस वहीं से शुरू हुआ भोजपत्र को ब्रांड बनाने की यात्रा। आज उनके प्रोडक्ट की कीमत 10 हजार से 20 हजार रुपये तक है और सबसे खास बात कि भोजपत्र के छोटे-छोटे बचे टुकड़े भी बेकार नहीं जाते। निकिता उन्हें सूखे फूलों के साथ मिलाकर तैयार करती हैं सुंदर की-चेन। यानि विरासत भी सुरक्षित और प्रकृति भी सुरक्षित। यह केवल एक स्टार्टअप नही, यह है सनातन की विरासत और आत्मनिर्भर भारत का परफेक्ट उदाहरण। यह है सनातन की विरासत को भविष्य से जोड़ने का मिशन। जहां हिमालय की परम्परा और युवाओं की क्रिएटिविटी मिलकर बना रही है नई पहचान।



